रूस के तेल पर अमेरिका का बड़ा दांव, भारत-चीन पर कितना असर? जी, हां अमेरिकी सीनेट में रूस पर नए प्रतिबंध विधेयक के पास होने से रूसी क्रूड ऑयल की सप्लाई का जोखिम बढ़ा है। Kpler के एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक भारत और चीन को तेल की सप्लाई में तुरंत बदलाव की संभावना कम है।
अमेरिकी सीनेट में बहुमत से पास हुआ बिल
शुक्रवार को अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास किया। इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदार देशों से होने वाले इंपोर्ट पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2026’ का मकसद रूसी एनर्जी के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर कार्रवाई कर मॉस्को की कमाई घटाना है, ताकि यूक्रेन में युद्ध की फंडिंग मुश्किल हो।
बिल के सामने अभी कानूनी अड़चनें
सुमित रितोलिया के अनुसार, बहुमत से पास होने के बावजूद बिल के सामने कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें हैं। इसे अभी US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलना बाकी है। इसके बाद इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। असर इस बात पर निर्भर करेगा कि US प्रशासन इसे कितनी सख्ती से लागू करता है और क्या कोई छूट या रियायत देता है।
अमेरिका तेल की बड़ी रुकावट से बचेगा?
सुमित रितोलिया के मुताबिक फिजिकल सप्लाई सिक्योरिटी की चिंता में नीति-निर्माता कच्चे तेल की उपलब्धता में रुकावट वाले उपायों से बचते हैं। अमेरिका ऐसा कदम नहीं उठाएगा, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की भारी किल्लत और कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो, क्योंकि इससे आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। ग्लोबल क्रूड मार्केट में सप्लाई कम है और मिडिल ईस्ट की सप्लाई में अनिश्चितता से वैकल्पिक स्रोतों का महत्व बढ़ा है। बड़ी पाबंदी से मौजूदा ट्रेड और ग्लोबल सप्लाई-डिमांड संतुलन प्रभावित हो सकता है।
अमेरिका की रूस से क्या है नाराजगी?
डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करना चाहते हैं। अमेरिका चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का डर बनाकर उन्हें बातचीत और युद्ध रोकने के लिए मजबूर करना चाहता है। रूस की अर्थव्यवस्था तेल और गैस निर्यात की कमाई पर टिकी है। अमेरिका और उसके सहयोगियों का मानना है कि रूस से तेल खरीदने वाले देश अप्रत्यक्ष रूप से उसे आर्थिक मदद पहुंचाते हैं।
खबर की प्रमुख बड़ी बातें
- अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास किया।
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
- बिल को अभी US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलना बाकी है।
- भारत और चीन को तेल की सप्लाई में तुरंत बदलाव की संभावना कम है।
- बड़ी पाबंदी से ग्लोबल सप्लाई-डिमांड संतुलन प्रभावित हो सकता है।
यह भी पढ़ें- Anushka ने प्यूमा पर लगाया बिना परमिशन फोटो इस्तेमाल करने का आरोप
हमारे फ़ैज़ी वेबसाइट से जुड़ने के लिए क्लिक करें
