यूपीआई भारत में भुगतान करने के सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों में से एक बन चुका है। डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने कुछ नियम बनाए हैं। ऐसे में अगर कोई दुकानदार यूपीआई से भुगतान करने पर अतिरिक्त राशि मांगता है, तो ग्राहक शिकायत दर्ज करा सकता है।
UPI पेमेंट पर दुकानदार एक्स्ट्रा चार्ज मांगे तो क्या करें?
मर्चेंट साइड चार्ज, जिसमें लागू मर्चेंट डिस्काउंट रेट भी शामिल है, मर्चेंट को ही उठाना होता है और अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को चुकाना होता है। ₹2000 से ज्यादा के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए बताए गए नियमों के तहत 0.4% का एमडीआर लागू हो सकता है।
अगर कोई दुकानदार यूपीआई इस्तेमाल करने के कारण अतिरिक्त पैसे मांगता है, तो ग्राहक उसे बता सकता है कि वह डिजिटल पेमेंट के लिए अलग से कोई चार्ज नहीं देना चाहता।
उदाहरण के लिए, किसी प्रोडक्ट की कीमत ₹500 है तो मर्चेंट को आपसे सिर्फ ₹550 इसलिए नहीं मांगने चाहिए क्योंकि अतिरिक्त ₹5 का यूपीआई चार्ज बताया जा रहा है।
NPCI के जरिए कैसे दर्ज करें शिकायत?
ग्राहक एनपीसीआई के शिकायत सिस्टम के जरिए यूपीआई ट्रांजैक्शन से जुड़ी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए एनपीसीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित यूपीआई शिकायत विकल्प चुनना होगा। मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए पर्सन टू मर्चेंट कैटेगरी चुनकर अतिरिक्त चार्ज से जुड़ी शिकायत का प्रकार चुना जा सकता है।
शिकायत के दौरान मर्चेंट और पेमेंट से जुड़ी जरूरी जानकारी देनी चाहिए। पेमेंट की रसीद, बिल और ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट भी सुरक्षित रखें।
UPI ऐप और बैंक से भी कर सकते हैं संपर्क
गूगल पे, फोन पे और पेटीएम जैसे यूपीआई ऐप में मदद या ट्रांजैक्शन सपोर्ट के विकल्प मिलते हैं। ग्राहक पेमेंट हिस्ट्री से संबंधित ट्रांजैक्शन खोलकर हेल्प या डिस्प्यूट विकल्प देख सकते हैं।
ग्राहक अपने बैंक से भी संपर्क कर सकते हैं। बैंक की कस्टमर केयर सर्विस शिकायत या विवाद प्रक्रिया की जानकारी दे सकती है। ट्रांजैक्शन आईडी, तारीख, राशि और मर्चेंट की जानकारी साथ रखें।
बिल में एक्स्ट्रा राशि जुड़ने पर क्या करें?
अगर मर्चेंट जबरदस्ती बिल में यूपीआई से जुड़ी अतिरिक्त राशि जोड़ता है तो ग्राहक नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन से संपर्क कर सकता है। 1915 पर कॉल करके या ऑनलाइन शिकायत प्रक्रिया के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है।
10 जरूरी बातें
- यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त राशि की मांग की जा सकती है।
- ग्राहक अतिरिक्त चार्ज देने से इनकार कर सकता है।
- भुगतान पूरा न करने का फैसला लिया जा सकता है।
- जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करें।
- एनपीसीआई के शिकायत सिस्टम का इस्तेमाल करें।
- मर्चेंट ट्रांजैक्शन में पर्सन टू मर्चेंट कैटेगरी चुनें।
- पेमेंट की रसीद और बिल संभालकर रखें।
- ट्रांजैक्शन का स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
- यूपीआई ऐप के हेल्प या डिस्प्यूट विकल्प का इस्तेमाल करें।
- जरूरत पड़ने पर 1915 पर नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन में शिकायत करें।
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