जी, हां आप ने सही पढ़ा पासपोर्ट इंडेक्स ने एक दिन पहले ताजी सूची जारी की, जिसमें पता चलता है कि भारत का मोबिलिटी स्कोर कम हुआ है। इस साल इंडेक्स में भारत का स्कोर सबसे ज्यादा कम हुआ है।
अभी यानी मार्च 2023 में यह स्कोर कम होकर 70 रह गया है। कोरोना महामारी से पहले साल 2019 में यह 71 था, और बाद में साल 2022 में यह बढ़कर 73 पर पहुंच गया था। इसके साथ ही ताकतवर पासपोर्ट की सूची में भारत की रैंकिंग 06 पायदान नीचे आ गई है।
अब इतनी है भारत की रैंकिंग
इंडेक्स के अनुसार, इस साल भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग गिरकर 144 पर आ गई है। साल भर पहले भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग 138 थी। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब महामारी के बाद आवागमन तेजी से उबरा है और अर्थव्यवस्थाएं ओपन हुई हैं।
इस कारण गिरा भारत का स्कोर
इस साल भारत के साथ एशिया की कुछ अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के पासपोर्ट का प्रदर्शन भी खराब हुआ है। वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन और थाईलैंड जैसे एशियाई देशों के पासपोर्ट की रैंकिंग भारत की तरह ही कम हुई है। इससे पता चलता है कि एशियाई देश पिछले साल आवागमन में दुनिया भर में आई तेजी को भुनाने में असफल रहे हैं। भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में गिरावट का मुख्य कारण यूरोपीय यूनियन की नीति है।
इन देशों की सुधरी रैंकिंग
एशियाई देशों में सबसे अच्छा प्रदर्शन दक्षिण कोरिया का है। इस देश का पासपोर्ट 174 मोबिलिटी स्कोर के साथ 12वें स्थान पर है, वहीं जापान 172 स्कोर के साथ 26वें पायदान पर काबिज है। इस साल सिर्फ 10 देशों का स्कोर बेहतर हुआ है। स्वीडन अब जर्मनी को पछाड़ दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। केन्या की रैंकिंग में चार पायदान की तेजी आई है। यह इस साल किसी भी देश की सबसे बड़ी छलांग है।
ऐसे तय होती है ताकत
किसी भी देश के पासपोर्ट की ताकत का पता इस बात से चलता है कि उस देश के नागरिक बिना वीजा की जरूरत के कितने ज्यादा देशों की यात्रा कर सकते हैं। इसी के हिसाब से किसी देश के पासपोर्ट का मोबिलिटी स्कोर तय होता है।
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