खाड़ी देशों में जारी तनाव अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल रहा है। कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से आयात में कमी देखी जा रही है। इसका असर यह है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास उपलब्ध LPG स्टॉक तेजी से घट रहा है। हालात को संभालने के लिए सरकार और कंपनियां वैकल्पिक उपायों पर काम कर रही हैं।
14.2 किलो सिलेंडर में गैस घटाने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घरेलू LPG सिलेंडर में गैस की मात्रा कम करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के तहत 14.2 किलो वाले सिलेंडर में करीब 10 किलो गैस भरने की योजना बनाई जा सकती है। इसका उद्देश्य सीमित सप्लाई के बावजूद ज्यादा से ज्यादा घरों तक गैस पहुंचाना है।
आयात में कमी, स्टॉक पर दबाव
देश में LPG आयात इस समय दबाव में है क्योंकि खाड़ी देशों से नए शिपमेंट नहीं पहुंच रहे हैं। हाल ही में दो जहाजों से लगभग 92,700 टन गैस आई, जो भारत की केवल एक दिन की जरूरत के बराबर है। ऐसे में सप्लाई और मांग के बीच संतुलन बनाना चुनौती बन गया है।
कमर्शियल सप्लाई से बढ़ी मुश्किल
कमर्शियल उपयोगकर्ताओं के लिए गैस सप्लाई फिर शुरू होने से उपलब्ध स्टॉक पर और दबाव बढ़ गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि LPG की स्थिति फिलहाल चिंता का विषय बनी हुई है।
कम गैस वाले सिलेंडर की कीमत कैसे होगी तय
अगर सिलेंडर में गैस की मात्रा घटाई जाती है, तो उसकी कीमत भी उसी अनुपात में तय की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे सिलेंडरों पर अलग स्टिकर लगाया जाएगा ताकि उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी मिल सके। इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स में तकनीकी बदलाव और जरूरी मंजूरियां लेना भी आवश्यक होगा।
कंपनियों ने जताई चिंता
इस योजना को लेकर ऑयल कंपनियों ने चिंता जताई है। उनका मानना है कि सिलेंडर का वजन कम होने से उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, चुनावी राज्यों में इस फैसले का विरोध भी देखने को मिल सकता है।कंपनियों के अनुसार, यदि अगले महीने तक हालात नहीं सुधरे तो यह स्थिति और गंभीर रूप ले सकती है।
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