चार लेबर कोड के जरिए मजदूरों और कर्मचारियों को अधिकारविहीन करने के आरोपों के बीच केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर 12 फरवरी 2026 को पूरे देश में विशाल राष्ट्रीय हड़ताल का ऐलान किया गया है। इसी क्रम में हल्द्वानी में भी श्रमिक संगठन बुधपार्क में संयुक्त प्रदर्शन करेंगे।
यह निर्णय ऐक्टू कार्यालय में आयोजित यूनियन प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक में लिया गया। बैठक में सभी संगठनों ने एक स्वर में चारों श्रमिक विरोधी लेबर कोड रद्द करने और पुराने 29 श्रम कानूनों की बहाली की मांग उठाई।
मजदूर मेहनत कर रहे, मुनाफा किसी और का
ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड के.के. बोरा ने कहा कि देश में रिकॉर्ड उत्पादन मजदूरों की मेहनत से हो रहा है, लेकिन इसका लाभ आम कामगार तक नहीं पहुंच रहा। फैक्ट्री मजदूरों से लेकर आशा, भोजनमाता, निर्माण श्रमिक और असंगठित क्षेत्र के कामगार बेहद कम मजदूरी और असुरक्षित हालात में जीने को मजबूर हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि 4 लेबर कोड के जरिए संविधान प्रदत्त श्रम अधिकार छीने गए हैं, जिससे मजदूरों के शोषण पर रोक लगाना लगभग असंभव हो गया है। नई वेतन संहिता में 193 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी तय करना श्रमिकों का अपमान है।
“लेबर कोड = ज्यादा काम, कम वेतन”
बीमा कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष हिमांशु चौधरी ने कहा कि लेबर कोड का असली उद्देश्य काम के घंटे बढ़ाना, वेतन घटाना और सामाजिक सुरक्षा खत्म करना है। इसी के खिलाफ लंबे आंदोलन की कड़ी में 12 फरवरी की हड़ताल बुलाई गई है।
आज़ादी के संघर्ष से मिले अधिकार छीने जा रहे
ऐक्टू जिलाध्यक्ष जोगेंद्र लाल ने कहा कि 29 श्रम कानून आज़ादी के संघर्ष और डॉ. अंबेडकर की संवैधानिक सोच का परिणाम थे, जिन्हें अब खत्म किया जा रहा है।
महिला कामगार भी मोर्चे पर
आशा यूनियन की रिंकी जोशी और भोजनमाता संगठन की रजनी जोशी ने कहा कि महिला कामगारों पर काम का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा। इसलिए महिलाएं पूरी ताकत से हड़ताल में शामिल होंगी।
भाकपा माले के डॉ. कैलाश पाण्डेय ने आरोप लगाया कि ‘विकसित भारत’ के नाम पर आम जनता को गुलामी की ओर धकेला जा रहा है।
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