NEET पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने छात्रों की रिहाई, पुलिस कार्रवाई और कथित हिंसा से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं।
NEET प्रदर्शन में हिरासत में लिए गए छात्रों की तत्काल रिहाई का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि NEET पेपर लीक के आरोपों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हुए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए, यदि उनके खिलाफ पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों पर पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और जिन्हें केवल विरोध-प्रदर्शनों के कारण आरोपी बनाया गया है, उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित हिंसा से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन बाद में मध्य प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों तक फैल गए, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
याचिकाओं में पेलेट गन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि छात्र कथित NEET पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया। याचिकाओं के अनुसार कार्रवाई के दौरान लाठीचार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) में हुई कई घटनाओं का भी उल्लेख किया गया, जिनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे गए गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कई गंभीर आरोप प्रस्तुत किए गए, जिनमें शामिल हैं—
- कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल से कई छात्र घायल हुए और एक छात्र की एक आंख की रोशनी चली जाने की खबर सामने आई।
- रबर की गोलियों के इस्तेमाल से कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने का दावा किया गया।
- भीड़ को हटाने के लिए इलेक्ट्रिक बैटन इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया।
- कील लगी लाठियों के प्रयोग से कुछ लोगों को स्थायी विकलांगता और गंभीर चोटें पहुंचने का आरोप लगाया गया।
- प्रदर्शन की कवरेज कर रहे एक मीडियाकर्मी पर कथित हमले और गंभीर रूप से घायल किए जाने का भी दावा किया गया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन आरोपों की सत्यता पर उसने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है और पूरा मामला न्यायिक विचाराधीन है।
सात राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कथित हिंसा के संबंध में जवाब मांगा है। अदालत ने राज्यों से याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया दाखिल करने को कहा है।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि NEET विरोध प्रदर्शन से जुड़ी सभी घटनाओं के CCTV फुटेज सुरक्षित रखे जाएं। अदालत का मानना है कि ये रिकॉर्ड याचिकाओं में लगाए गए आरोपों और राज्य सरकारों के जवाबों की निष्पक्ष जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यह भी पढ़ें- Anushka ने प्यूमा पर लगाया बिना परमिशन फोटो इस्तेमाल करने का आरोप
हमारे फ़ैज़ी वेबसाइट से जुड़ने के लिए क्लिक करें
