Monday, October 25, 2021
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Diabetes वालों को रहता है हार्ट अटैक का खतरा, ऐसे बचा सकते हैं जान

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डायबिटीज वालों को सबसे अधिक हार्ट अटैक का खतरा रहता है। जी हां, आप ने सही पढ़ा वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में पता चला है कि वो मधुमेह रोगी (diabetes) जिन्हें स्ट्रोक है, उनके लिए दिल के दौरे या या कई तरह की संवहनी बीमारियों (vascular diseases) जोखिम को कम करने के लिए ब्लड शुगर की रेंज को धीमा करना या कहें कि आइडल ब्लड शुगर लेवल मददगार हो सकता है। शोध के निष्कर्ष मेडिकल जर्नल ‘न्यूरोलॉजी’ (Neurology) में पब्लिश हुए हैं।

कोरिया स्थित सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन के एमडी, पीएचडी, अध्ययन लेखक मून-कू हान (Moon-Ku Han) ने कहा, ‘हम जानते हैं कि मधुमेह से पहले स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन शोध बताते हैं कि एक ऑप्टीमल ब्लड शुगर लेवलर स्ट्रोक, दिल का दौरा या अन्य संवहनी समस्याओं के जोखिम को कम कर सकता है और ये 6.8 प्रतिशत से 7.0 प्रतिशत की सीमा में सही माना जाता है।’

शोध में 18,567 लोग हुए शामिल

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शोध में औसतन 70 की उम्र के 18,567 मधुमेह रोगी शामिल थे। इन सभी लोगों को इस्केमिक स्ट्रोक के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जो ब्लड क्लोटिंग के कारण होता है। शुरुआत में शोधकर्ताओं ने पिछले दो से तीन महीनों में लोगों के एवरेज ब्लड शुगर लेवल को निर्धारित करने के लिए हीमोग्लोबिन A1C नाम के एक टेस्ट किया।

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ये टेस्ट शुगर के साथ ब्लड कोटिड में हीमोग्लोबिन प्रोटीन के प्रतिशत को मीजर करता है जिसमें 5.7 फीसदी से नीचे के लेवल को नॉर्मल माना जाता है और 6.5 प्रतिशत या इससे अधिक हो तो ये डायबिटीज होने के संकेत देता है। परीक्षण में इन सभी प्रतिभागियों का एवरेज A1C 7.5 प्रतिशत था।

8% diabetes के मरीजों की हुई मौत

इस रिसर्च के एक साल बाद फिर शोधकर्ताओं ने ये पता करने का प्रयास किया कि क्या हीमोग्लोबिन A1C टेस्ट के लेवल के बीच एक और स्ट्रोक, दिल का दौरा, या इन या अन्य वैस्कुलर डिजीज से मौत के जोखिम के बीच कोई संबंध था। शोधकर्ताओ के अनुसार, सभी 18,567 प्रतिभागियों में से करीब 8 फीसदी यानी 1436 लोगों की एक साल के भीतर दिल का दौरा पड़ने या वैस्कुलर डिजीज के कारण मौत हो गई और 954 यानी 5 फीसदी रोगियों को स्ट्रोक आया था।

A1C से 7% के अधिक होने पर बढ़ जाता है स्ट्रोक का खतरा

अध्ययन में पाया गया कि जिन्हें हीमोग्लोबिन प्रोटीन के 6.8 प्रतिशत से 7.0 प्रतिशत के अधिक A1C लेवल तक आने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनमें दिल का दौरा, वैस्कुलर डिजीज होने के साथ-साथ स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ गया था। इनमें एक और स्ट्रोक होने का खतरा 6.5 प्रतिशत से नीचे वाले लोगों की तुलना में 7.0 प्रतिशत से ऊपर ए1सी के स्तर के साथ अस्पताल में भर्ती होने पर 28 प्रतिशत अधिक था। हान ने कहा, ‘यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं और आपको स्ट्रोक हुआ है तो हमारे निष्कर्ष आपके ब्लड शुगर पर कड़ी नजर रखने के महत्व को उजागर करते हैं।’

हम आपको ताजा खबरें भेजते रहेंगे....!

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