समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को रामपुर की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने दोहरे पैन कार्ड मामले में सात साल कैद की सजा सुनाई है। यह मामला दिसंबर 2019 में दर्ज किया गया था, जिसमें दोनों पर अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड रखने का आरोप लगाया गया था।
यह मुकदमा भाजपा नेता और मौजूदा विधायक आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज हुआ था। सक्सेना ने आरोप लगाया था कि आज़म खान और उनके बेटे ने जाली दस्तावेजों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए और उनका उपयोग बैंकिंग लेनदेन, आयकर रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक कामों में किया।
शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार, अब्दुल्ला आज़म के नाम पर जारी दो पैन कार्ड में जन्मतिथि अलग-अलग थी।
- पहले पैन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993
- दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज थी
आरोप है कि इन दोनों पैन कार्डों का उपयोग बैंकिंग, आयकर दाखिलों और चुनावी उद्देश्यों के लिए किया गया। दस्तावेजों की जांच के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ से जुड़े प्रावधानों में मामला दर्ज किया था।
अदालत में दोषी करार, सुनवाई के बाद सजा घोषित
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी करार दिया और फैसले के तुरंत बाद अदालत कक्ष में ही हिरासत में ले लिया गया। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता विधायक आकाश सक्सेना भी मौजूद थे। फैसला आने के बाद अदालत ने दोनों को सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई।
यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ था, और इस फैसले को प्रदेश की सियासत में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
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