खबर संसार नई दिल्ली : शारदीय Navratri 2021- मां कात्यायनी की ऐसे करें पूजा-अर्चना, नवरात्र का छठा दिन अर्थात मां कात्यायनी की आराधना का दिन। मां कात्यायनी को ब्रह्मा की मानस पुत्री कहा गया है। माता की चार भुजाएं हाथ में तलवार और पुष्प कमल हैं। और सिंह पर सवार हैं। मां कात्यायनी ने असुर महिषासुर का वध किया था। मां की आधाना करने से धर्म, अर्थ, कर्म, मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां की सच्चे मन की गई पूजा-अर्चना से शत्रुओं का नाश होता है।
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Navratri 2021 ऐसे करें मां कात्याययनी की पूजा
Navratri 2021 मां कात्यायनी की पूजा अर्चना करते समय मां को गंगाजल, कलावा, नारियल, कलश, चावल, रोली, चुन्नी, अगरबत्ती, शहद, धूप-दीप और घी लगाना चाहिए। माता की पूजा करने के बाद ध्यान पूर्वक पद्मासन में बैठकर देवी के मंत्र ‘कंचनाभा वराभयं पद्मधरां मुकटोज्जवलां, स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनी नमोस्तुते.’ का जाप करना चाहिए।
मां कात्यायनी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार मां कात्यायनी ने महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। माता के अनन्य भक्त थे ऋषि कात्यायन। इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने इनके घर पुत्री रूप में प्रकट होने का वरदान दिया। ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण देवी कात्यायनी कहलाईं। महिषासुर एक असुर था, जिससे सभी लोग परेशान थे। मां ने इसका वध किया था। इस कारण मां कात्यायनी को दानवों, असुरों और पापियों का नाश करने वाली देवी कहा जाता है। कात्यायनी माता का व्रत और उनकी पूजा करने से कुंवारी कन्याओं के विवाह में आने वाली बाधा दूर होती है।
मां कात्यायनी के मंत्र
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
