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अजित डोभाल की चेतावनी के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी दुनिया की नजरें

 

दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, तनाव और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने एक बार फिर सहयोग आधारित सुरक्षा व्यवस्था की अपनी सोच को मजबूती से सामने रखा। नई दिल्ली में आयोजित BIMSTEC देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की पांचवीं बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि साझा चुनौतियों का समाधान संघर्ष नहीं, बल्कि विश्वास, समन्वय और साझेदारी से ही संभव है।

नई दिल्ली में हुई BIMSTEC देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अहम बैठक

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों तथा प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान BIMSTEC महासचिव ने सुरक्षा क्षेत्र में संगठन की प्रगति और सदस्य देशों के बीच चल रहे सहयोग का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इसके बाद सभी सदस्य देशों ने आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, कनेक्टिविटी और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक एवं परिणामोन्मुख उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

समुद्री राहत अभियान और कानून प्रवर्तन के लिए बने साझा दिशा-निर्देश

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि समुद्री मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) से जुड़े समुद्री संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों को अपनाना रही। इन दिशा-निर्देशों के लागू होने से प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सदस्य देश पहले से अधिक तेज, प्रभावी और समन्वित राहत अभियान संचालित कर सकेंगे। इसके साथ ही समुद्र में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए साझा मार्गदर्शक सिद्धांतों को भी मंजूरी दी गई। इनका उद्देश्य समुद्री अभियानों में पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और सुरक्षा को मजबूत बनाना तथा गलतफहमियों और संभावित टकराव की आशंकाओं को कम करना है।

अजित डोभाल बोले- क्षेत्रीय सहयोग अब जरूरत बन चुका है

अपने संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में क्षेत्रीय सहयोग अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय सशस्त्र संघर्षों, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी बदलावों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से उत्पन्न आर्थिक दबावों का सामना कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे माहौल में BIMSTEC देशों को साझा हितों की रक्षा के लिए सामूहिक और निर्णायक कदम उठाने होंगे।

दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच

अजित डोभाल ने BIMSTEC की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मंच दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो सबसे गतिशील क्षेत्रों को जोड़ता है। लगभग 1.7 अरब आबादी और करीब पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की संयुक्त अर्थव्यवस्था वाला यह समूह वैश्विक आबादी के लगभग 22 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को केवल बंगाल की खाड़ी ही नहीं जोड़ती, बल्कि हजारों वर्षों की साझा सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंध भी इन्हें मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

आतंकवाद और साइबर खतरों पर बढ़ेगा साझा सहयोग

डोभाल ने कहा कि BIMSTEC ने आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, साइबर खतरों और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब संगठन नई और उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक क्षमता विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क, क्षमता निर्माण और आर्थिक सुरक्षा आने वाले समय में भी BIMSTEC सहयोग के प्रमुख आधार बने रहेंगे।

हिंद महासागर की सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती

सामरिक दृष्टि से यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हिंद महासागर और विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी वैश्विक समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। ऐसे में समुद्री कानून प्रवर्तन और आपदा राहत के साझा मानकों पर सहमति क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे समुद्री डकैती, अवैध तस्करी, मानव तस्करी, आतंकवादी गतिविधियों और समुद्री आपदाओं के दौरान सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

भारत की क्षेत्रीय रणनीति को मिला नया बल

यह बैठक कई महत्वपूर्ण रणनीतिक संकेत भी देती है। भारत BIMSTEC को अपनी नेबरहुड फर्स्ट नीति, एक्ट ईस्ट नीति और “महासागर” विजन के प्रमुख स्तंभ के रूप में आगे बढ़ा रहा है। इसके साथ ही दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के सेतु के रूप में BIMSTEC की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। साथ ही यह मंच आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए साझा संस्थागत ढांचा तैयार करने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

30 वर्ष पूरे करने की ओर बढ़ रहा है BIMSTEC

वर्ष 1997 में बैंकॉक घोषणा के तहत स्थापित BIMSTEC अगले वर्ष अपनी स्थापना के 30 वर्ष पूरे करेगा। शुरुआत में BIST-EC के रूप में स्थापित यह संगठन आज सात सदस्य देशों का प्रभावशाली क्षेत्रीय मंच बन चुका है। बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह भी संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में BIMSTEC हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है।


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