जी, हां, हरियाणा के नूंह में हालिया दंगे के बाद वहां काफी तनाव है। मेवात के इस इलाके में धार्मिक सौहार्द के बिगड़ने की अक्सर घटनाएं सामने आती रहती हैं। सोमवार को धार्मिक जुलूस के दौरान हुए पथराव में कई लोग घायल हो गए। नूंह में धार्मिक जुलूस में हुए उपद्रव में दो होम गार्ड समेत तीन लोगों की मौत हो गई।
कथित तौर पर होम गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाद में गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे इलाकों में अशांति फैल गई। पुलिस ने कहा कि सोमवार की झड़प में कम से कम 60 लोग घायल हो गए। इनमें से कुछ की हालत गंभीर है। घायलों में कई पुलिसकर्मी हैं। मेव मुस्लिमों के गढ़ नूंह में धार्मिक सौहार्द बिगड़ने की स्थिति साल 2016 में भी आई थी जब 24 अगस्त, 2016 को दो लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।
नूंह में क्यों हैं इनकी आबादी?
मेव मुस्लिम इस इलाके में हमेशा से बड़ी संख्या में रहे हैं। आखिर क्या वजह कि यहां इनकी इतनी आबादी है। मेव मुसलमान पूर्वी राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के निकटवर्ती क्षेत्र में फैले हुए हैं। इनके अस्तित्व को लेकर कई तरह के मत हैं। कुछ लोग कहते हैं कि इनकी जड़ें ईरान में हैं, अन्य कहते हैं कि वे मीना जनजातियों से हैं जिन्होंने इस्लाम अपना लिया।
20 लाख मेओं ने मुख्य रूप से हरियाणा के मेवात जिले और राजस्थान के निकटवर्ती अलवर और भरतपुर में फैले हुए हैं। ऐसा बताते हैं कि मेवों ने 15वीं से 17वीं शताब्दी के दौरान विभिन्न चरणों में इस्लाम अपनाया। 1926 में तब्लीगी जमात ने हिंदू और इस्लामी दोनों रीति-रिवाजों का पालन करने वाले इस समुदाय को उस समय फिर से इस्लामी खेमे में शामिल कर लिया, जब आर्य समाजियों ने ‘शुद्धि’ और ‘संगठन’ आंदोलन शुरू किया था।
कई परिवारों में हैं हिंदू नाम
कद काठी और पहनावे पर गौर करें तो मेव मुस्लिम मेओ फेटा (पगड़ी) और गैर-मेओ पगड़ी पहनते हैं। महिलाएं बुर्का नहीं बल्कि सिर पर हल्का घूंघट रखती हैं। वे हिंदुओं की तरह एक ही गोत्र में शादी नहीं करते। कई परिवार अभी भी बच्चों को उनके हिंदू नामों से बुलाते हैं। अमर सिंह, चांद सिंह, सोहराब सिंह मेव नाम हैं जिनमें खान जैसे टाइटल उनकी मुस्लिम पहचान को जाहिर करने के लिए जोड़े गए हैं।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस






