अमेरिका की निगरानी के बावजूद कैसे बची ईरान की न्यूक्लियर साइट? ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बन गई हैं। इस बार चर्चा में है ‘पिकैक्स माउंटेन’, जो माना जा रहा है कि ईरान की सबसे सुरक्षित और दुर्गम अंडरग्राउंड न्यूक्लियर साइट है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह साइट इतनी गहराई में स्थित है कि अमेरिका के B2 स्टील्थ बॉम्बर्स भी इसे नष्ट नहीं कर सकते।
नातांज के पास स्थित है रहस्यमयी पिकैक्स
मैक्सर टेक्नोलॉजी की सैटेलाइट तस्वीरों और ‘मिरर’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह साइट नातांज परमाणु केंद्र से कुछ ही मिनटों की दूरी पर है। नातांज वही जगह है जहां अमेरिका ने ट्रंप के आदेश पर बमबारी कर तीन परमाणु ठिकानों को तबाह करने का दावा किया था। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई ईरान का संवर्धित यूरेनियम पूरी तरह नष्ट हो गया?
सुरंगों में छिपा 400 किलो यूरेनियम?
सैटेलाइट इमेज में हमले से पहले पिकैक्स इलाके में असामान्य गतिविधियां देखी गईं। भारी लोरियां अंदर-बाहर जाती दिखाई दीं, जिससे यह आशंका और गहराई कि यहां 400 किलो तक संवर्धित यूरेनियम छिपाया गया हो सकता है। यह यूरेनियम परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है। पिकैक्स की संरचना 100 मीटर गहराई में है और इसमें चार सुरंगें हैं, जो इसे किसी भी हमले से बचा सकती हैं।
IAEA को नहीं मिली एंट्री, रिश्तों में दरार
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने पिकैक्स साइट पर जानकारी मांगी थी, लेकिन ईरान ने साफ मना कर दिया। इससे ईरान और IAEA के रिश्तों में और कड़वाहट आ गई है। ईरानी संसद ने IAEA के साथ सहयोग को सस्पेंड कर दिया है। वहीं, अमेरिका ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू हो सकती है, बशर्ते इजरायल-ईरान संघर्ष और न बढ़े।
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