अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सीजफायर और बातचीत के माहौल के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची रूस पहुंच गए हैं। इससे पहले वह पाकिस्तान और ओमान का दौरा कर चुके थे। मॉस्को में उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जिसे मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पाकिस्तान दौरे को बताया ‘प्रोडक्टिव’, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
रूस रवाना होने से पहले अरागची ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत को ‘प्रोडक्टिव’ बताया। उन्होंने कहा कि वहां उन्हें “अच्छा सलाह-मशवरा” मिला। हालांकि, कूटनीतिक भाषा के बावजूद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, क्योंकि इस्लामाबाद में वार्ता का पहला दौर सफल नहीं रहा था।
दूसरे दौर की बातचीत को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। पहले ऐसी अटकलें थीं कि अमेरिकी प्रतिनिधि, जिनमें जेडी वेंस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं, इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत के लिए पहुंचेंगे। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।
रूस बना संभावित मध्यस्थ, मॉस्को में बढ़ी हलचल
अमेरिका-ईरान बातचीत में ठहराव के बाद रूस को संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि अरागची का मॉस्को दौरा अहम हो गया है। रूस ने संकेत दिए हैं कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
पुतिन का खास संदेश, रिश्तों में गहराता भरोसा
बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता के लिए विशेष संदेश भेजा और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। इसे महज औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों का संकेत माना जा रहा है।
पुतिन ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी ईरान के लोग मजबूती से खड़े रहेंगे और भविष्य में हालात बेहतर होंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है।
ऊर्जा और सैन्य सहयोग से मजबूत हुए संबंध
पिछले कुछ वर्षों में रूस और ईरान के बीच रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। ऊर्जा सहयोग, सैन्य साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के समर्थन ने दोनों देशों को रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित किया है। खासतौर पर अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों की सोच कई बार एक जैसी रही है।
ओमान दौरा और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर चर्चा
रूस जाने से पहले अरागची ओमान भी गए थे। माना जा रहा है कि इस दौरे में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। ईरान ने पहले इस समुद्री मार्ग पर टोल लगाने की बात कही थी और इसमें ओमान को शामिल करने का संकेत दिया था, हालांकि ओमान ने इस प्रस्ताव से इनकार किया था।
US-ईरान वार्ता पर सस्पेंस कायम
पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कब और कैसे आगे बढ़ेगी। पाकिस्तान, ओमान और अब रूस की सक्रियता से यह साफ है कि कई देश इस बातचीत को पटरी पर लाने की कोशिश में हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
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