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आख़िर क्यों सावन के सोमवार शिव भक्तों के लिए होते हैं बेहद ख़ास?

श्रावण मास भगवान शिव को सबसे प्रिय माना गया है। जानिए क्यों सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाना, व्रत रखना और रुद्राभिषेक करना सबसे फलदायी माना जाता है। हिन्दू धर्म में श्रावण मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। भगवान शिव ने स्वयं इस मास के महत्व को बताते हुए कहा है — “मासों में श्रावण मुझे अत्यंत प्रिय है। इसका माहात्म्य श्रवण मात्र से ही सिद्धि देने वाला है।” इस महीने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों के पाप नष्ट होते हैं।


सावन के सोमवार का व्रत क्यों खास?

सनातन परंपरा में सोमवार शिव जी का दिन माना जाता है। श्रावण मास के दौरान सोमवार व्रत रखने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे गृहस्थ जीवन सुखमय बनता है, सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जप और दान करने से आत्मिक शुद्धि भी होती है।


कब से शुरू हो रहा है श्रावण मास?

इस वर्ष श्रावण मास की कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई को मानी जाएगी, जो रक्षाबंधन की श्रावणी पूर्णिमा 9 अगस्त तक चलेगा। इस बार सावन में 4 सोमवार का विशेष संयोग बन रहा है — 14, 21, 28 जुलाई और 4 अगस्त।

भारत में इस दिन संस्कृत दिवस भी मनाया जाता है और श्रावण को ‘संस्कृत मास’ के रूप में भी जाना जाता है।


सावन में क्या करें?

✅ शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र चढ़ाएं।
✅ ‘ॐ नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
✅ सोमवार का व्रत रखें और रुद्राभिषेक करें।
✅ गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करें।

श्रावण मास के विशेष व्रत एवं पर्व

  • 11 जुलाई, श्रावण मास का प्रारम्भ
  • 12 जुलाई, अशून्य शयन व्रत
  • 14 जुलाई, प्रथम श्रावणी सोमवार /गणेश चतुर्थी व्रत
  • 15 जुलाई, मंगला गौरी व्रत
  • 16 जुलाई, श्रावण संक्रान्ति
  • 17 जुलाई, शीतला सप्तमी
  • 21जुलाई, द्वितीय सोमवार / कामिका एकादशी
  • 22 जुलाई, भौम प्रदोष
  • 23 जुलाई, श्रावणी शिवरात्रि
  • 24 जुलाई, श्रावणी अमावस्या
  • 28 जुलाई, तृतीय सोमवार /विनायक चतुर्थी
  • 29 जुलाई, नागपंचमी
  • 30 जुलाई, कल्कि जयन्ती
  • 31 जुलाई,गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती/ शीतला सप्तमी
  • 04 अगस्त, चतुर्थ सोमवार
  • 05 अगस्त,पवित्रा एकादशी
  • 06 अगस्त, प्रदोष व्रत
  • 08 अगस्त, पूर्णिमा व्रत
  • 09 अगस्त, श्रावणी पूर्णिमा/ रक्षाबन्धन (श्रावण का अन्तिम दिन)

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