विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) का मकसद लोगों को अत्यधिक जनसंख्या के खतरे बताना था। लेकिन आज चीन, रूस, जापान और जर्मनी जैसे बड़े देश गिरती आबादी के कारण परेशान हैं। जन्मदर बढ़ाने के लिए सरकारें पैसों का लालच, कर में छूट और प्रवासियों को बढ़ावा दे रही हैं। बावजूद इसके, हालात संभल नहीं रहे।
क्यों घट रही है जनसंख्या?
महंगा जीवनशैली अपनाने की होड़, महिलाओं का करियर पर ध्यान, शादी में देरी, बच्चों पर ज्यादा खर्च और काम का दबाव इसकी बड़ी वजहें हैं। चीन में दशकों तक चली वन चाइल्ड पॉलिसी, जापान में बुजुर्गों का बढ़ता अनुपात और युवाओं का पलायन भी जनसंख्या में गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं।
आखिर क्यों डराती है गिरती आबादी? जानिए 5 वजहें
बुजुर्गों का बढ़ता बोझ
जन्मदर घटने से बुजुर्गों की संख्या बढ़ती है। उनकी पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और देखभाल पर सरकारी खर्च बढ़ जाता है। जापान में तो रोबोट तक बुजुर्गों की सेवा में लगाए गए हैं।
कामकाजी युवाओं की कमी
युवा कम होने से कंपनियों को श्रमिक नहीं मिलते, प्रोडक्टिविटी घटती है और अर्थव्यवस्था कमजोर होती है।
घटती कर आय
कम युवा मतलब टैक्सपेयर्स कम। नतीजा, सरकार की आमदनी घट जाती है और बाजार में मांग भी कमजोर होती है।
विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता
कमी पूरी करने के लिए दूसरे देशों से श्रमिक बुलाने पड़ते हैं, जिनकी कमाई अपने देश वापस जाती है। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
जनसंख्या में असंतुलन
महिलाओं के करियर-फोकस और परिवार में देरी के चलते पुरुष-महिला अनुपात बिगड़ रहा है।
कैसे शुरू हुआ विश्व जनसंख्या दिवस?
11 जुलाई 1987 को दुनिया की आबादी 5 अरब हुई। इसके बाद UNDP ने 1989 में जागरुकता बढ़ाने के लिए विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का निर्णय लिया। 1990 से यह हर साल मनाया जाता है। आज भारत ने चीन को पीछे छोड़कर सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बनकर नया रिकॉर्ड बना लिया है। लेकिन गिरती जन्मदर से परेशान देशों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है।
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