भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद ने तेजस लड़ाकू विमानों के इंजन सप्लाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका की नाराज़गी अब रक्षा सहयोग पर असर डाल सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर पहले 25% टैरिफ लगाया, फिर अतिरिक्त 25% टैरिफ का ऐलान किया। 27 अगस्त से यह बढ़कर 50% होने वाला है। इसके विपरीत, चीन को अमेरिका ने 90 दिनों की राहत दी है और पुतिन से ट्रंप की मुलाकात भी तय है।
रक्षा डील पर अटकलें और तेजस Mk1A की स्थिति
अमेरिका के जनरल इलेक्ट्रिक (GE) द्वारा तेजस Mk1A के लिए F404 इंजन सप्लाई में देरी हो रही है। बीते साल से अब तक सिर्फ 2 इंजन दिए गए हैं और 3 और आने वाले हैं। GE ने वादा किया है कि अक्टूबर से हर महीने 2 इंजन सप्लाई किए जाएंगे।
भारत ने 99 इंजनों का पहला ऑर्डर दिया था, लेकिन देरी के कारण प्रक्रिया धीमी हुई। हिंदुस्तान एरोनॉटिकल लिमिटेड (HAL) को इन इंजनों की जरूरत है ताकि विमान उत्पादन समय पर हो सके।
नया ऑर्डर और संशोधित डिलीवरी प्लान
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में 97 और तेजस Mk1 विमानों के लिए मंजूरी दे दी है। इन पर भी F404 इंजन लगेंगे, जिसका सौदा अगस्त अंत तक फाइनल हो सकता है।
2021 में भारत ने GE के साथ 716 मिलियन डॉलर का समझौता किया था, जिसमें 99 F404-IN20 इंजन शामिल थे। वैश्विक सप्लाई चेन दिक्कतों और दक्षिण कोरियाई कंपोनेंट सप्लायर की समस्याओं से समय-सीमा बिगड़ गई। अब पूरी डिलीवरी मार्च 2026 तक होने का लक्ष्य है।
भारतीय वायुसेना का बड़ा रोडमैप
भारतीय वायुसेना का लक्ष्य तेजस बेड़े को 352 विमानों तक बढ़ाना है, जिसमें Mk1A और Mk2 दोनों वेरिएंट शामिल होंगे। इंजन सप्लाई में स्थिरता आने पर यह महत्वाकांक्षी योजना तेज गति से आगे बढ़ सकती है।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस


