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अचानक रडार से गायब हुआ F-35, UAE में इमरजेंसी लैंडिंग से मचा हड़कंप

मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल F-35 लाइटनिंग-II ने 11 मई को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आपातकालीन लैंडिंग की। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हलचल तेज कर दी है और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव को नया मोड़ दे दिया है।


उड़ान के दौरान प्रसारित किया गया इमरजेंसी कोड 7700

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी वायुसेना का यह स्टील्थ फाइटर जेट होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास रणनीतिक मिशन पर था। इसी दौरान विमान ने अचानक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी ट्रांसपोंडर कोड 7700 प्रसारित करना शुरू कर दिया।

एविएशन सेक्टर में कोड 7700 का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब विमान किसी गंभीर तकनीकी खराबी, सुरक्षा खतरे या आपात स्थिति का सामना कर रहा हो। बताया जा रहा है कि उस समय विमान ओमान की खाड़ी के ऊपर उड़ान भर रहा था।


अचानक बदला रास्ता, रडार से हुआ गायब

स्थिति तब और रहस्यमयी हो गई जब F-35 ने अचानक अपना रूट बदलते हुए UAE की दिशा पकड़ ली। रिपोर्ट्स के अनुसार जैसे ही विमान यूएई के एयरस्पेस में दाखिल हुआ, पायलट ने ट्रांसपोंडर बंद कर दिया। इसके बाद विमान कुछ समय के लिए रडार से गायब हो गया और सीधे अलधाफरा एयरबेस पर इमरजेंसी लैंडिंग की गई।


दूसरी बार आया संकट संकेत, बढ़ी चिंता

रक्षा विशेषज्ञों की चिंता इस बात को लेकर भी बढ़ गई है कि पिछले 24 घंटों में इसी यूनिट के विमान ने दूसरी बार कोड 7700 जारी किया है। दुनिया के सबसे उन्नत फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट्स में शामिल F-35 में बार-बार ऐसी स्थिति सामने आना तकनीकी खराबी की आशंका को मजबूत करता है।

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि यह मामला केवल मैकेनिकल फेलियर का नहीं है, तो इसके पीछे किसी बड़े सुरक्षा खतरे की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।


ईरान का दावा- अमेरिकी विमान को बनाया गया निशाना

घटना के बाद ईरान के सरकारी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई दावे सामने आए। ईरानी सूत्रों का कहना है कि उनके डिफेंस सिस्टम ने अमेरिकी विमान को अपनी सीमा के पास ट्रैक किया था।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि विमान को नुकसान पहुंचाया गया, जिसके चलते उसे मिशन बीच में छोड़कर UAE में उतरना पड़ा। हालांकि स्वतंत्र सैन्य विश्लेषकों ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं।


सैन्य विशेषज्ञों ने ईरानी दावों पर उठाए सवाल

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि F-35 किसी मिसाइल या एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम का शिकार हुआ होता, तो उसका सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित अलधाफरा एयरबेस तक सुरक्षित पहुंचना बेहद मुश्किल होता। विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तकनीकी जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।


पेंटागन की चुप्पी से बढ़ीं अटकलें

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पेंटागन की चुप्पी ने कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। कई रक्षा विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या विमान में इंजन या नेविगेशन सिस्टम से जुड़ी तकनीकी खराबी आई थी, या फिर ईरान ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक के जरिए विमान के सिस्टम को प्रभावित करने की कोशिश की।


होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। इस इलाके में अमेरिकी सैन्य विमानों की सक्रिय मौजूदगी लंबे समय से ईरान को खटकती रही है। हाल के सप्ताहों में क्षेत्र में बढ़े सैन्य तनाव और ईरान से जुड़े हमलों ने मध्य पूर्व की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।


जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल अलधाफरा एयरबेस पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और विमान की गहन जांच जारी है। अगर जांच में यह साबित होता है कि F-35 किसी हमले का शिकार हुआ था, तो इससे मध्य पूर्व में बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है। वहीं अगर यह केवल तकनीकी खराबी निकलती है, तो अरबों डॉलर के F-35 प्रोग्राम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।


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