भारत में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता घटाने तथा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार लगातार एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए मारुति सुजुकी ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस वैगनआर को पेश किया है। यह कार पारंपरिक पेट्रोल के साथ-साथ उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर भी आसानी से चल सकती है।
E85 फ्यूल सपोर्ट के साथ आई नई तकनीक
नई फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी E85 ईंधन संगतता है। E85 में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। जहां वर्तमान में अधिकांश वाहन E20 ईंधन के लिए तैयार किए जा रहे हैं, वहीं यह नई तकनीक उससे कहीं आगे का कदम मानी जा रही है। फ्लेक्स-फ्यूल सिस्टम की मदद से वाहन ईंधन में मौजूद एथेनॉल और पेट्रोल के अनुपात को पहचानकर इंजन की कार्यप्रणाली को स्वतः समायोजित कर लेता है। इससे अलग-अलग मिश्रण वाले ईंधन पर भी वाहन का प्रदर्शन प्रभावित नहीं होता।
तेल आयात में कमी और किसानों को मिलेगा लाभ
सरकार एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देकर देश के कच्चे तेल आयात पर होने वाले भारी खर्च को कम करना चाहती है। भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। एथेनॉल के उपयोग में बढ़ोतरी से तेल आयात की आवश्यकता कम हो सकती है। वहीं, चूंकि एथेनॉल का उत्पादन गन्ने और अन्य कृषि फसलों से किया जाता है, इसलिए इसकी बढ़ती मांग किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकती है।
डिजाइन में नहीं बदलाव, तकनीक में हुआ बड़ा अपग्रेड
नई फ्लेक्स-फ्यूल वैगनआर का बाहरी डिजाइन सामान्य वैगनआर मॉडल जैसा ही रखा गया है। कंपनी ने इसके लुक और स्टाइल में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं किया है। हालांकि, फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को सपोर्ट करने के लिए वाहन के कई महत्वपूर्ण मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों को अपग्रेड किया गया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) को विशेष रूप से ट्यून किया गया है, ताकि यह अलग-अलग ईंधन मिश्रण के अनुसार इंजन को बेहतर तरीके से संचालित कर सके।
ECU करेगा ईंधन मिश्रण की लगातार निगरानी
कार में लगा स्मार्ट ECU लगातार यह मॉनिटर करता है कि फ्यूल टैंक में एथेनॉल और पेट्रोल का अनुपात कितना है। इसी जानकारी के आधार पर यह इंजन की सेटिंग्स को एडजस्ट करता है। इस तकनीक के कारण वाहन विभिन्न प्रकार के फ्यूल मिश्रण पर बेहतर प्रदर्शन देने के साथ-साथ इंजन की दक्षता और विश्वसनीयता भी बनाए रखता है।
पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार के लिए WagonR को ही क्यों चुना गया?
मारुति सुजुकी ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार के रूप में वैगनआर को इसलिए चुना है क्योंकि यह कंपनी के सबसे लोकप्रिय और सफल मॉडलों में शामिल है। यह कार अपने विशाल केबिन, आरामदायक सीटिंग, बेहतर माइलेज और कम मेंटेनेंस लागत के लिए जानी जाती है। कंपनी का मानना है कि वैगनआर की मजबूत लोकप्रियता ग्राहकों के बीच नई फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को तेजी से अपनाने में मदद करेगी।
कीमत थोड़ी अधिक, लेकिन लंबे समय में हो सकती है बचत
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के कारण इस मॉडल की कीमत सामान्य वैगनआर की तुलना में कुछ अधिक हो सकती है। हालांकि, यदि भविष्य में E85 ईंधन पेट्रोल से सस्ता उपलब्ध होता है, तो वाहन मालिकों को रोजमर्रा के ईंधन खर्च में अच्छी बचत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में ईंधन पर होने वाली बचत अतिरिक्त कीमत की भरपाई कर सकती है।
भारत में तेजी से बढ़ सकता है Flex Fuel Vehicles का बाजार
आने वाले वर्षों में भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की मांग बढ़ने की संभावना है। जैसे-जैसे एथेनॉल आधारित ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी, वैसे-वैसे उपभोक्ताओं का रुझान भी इस तकनीक की ओर बढ़ सकता है। ऑटोमोबाइल सेक्टर की कई अन्य कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर आधारित कारों और दोपहिया वाहनों के विकास पर काम कर रही हैं, जिससे भविष्य में यह सेगमेंट और मजबूत हो सकता है।
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