काठमांडू। नेपाल में युवाओं के प्रदर्शन और केपी शर्मा ओली की सरकार गिरने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल जेन-जेड आंदोलन से उपजे संकट को शांत करने में जुटे हैं। इस बीच, पुरानी राजनीतिक पीढ़ी को किनारे करने और नई अंतरिम सरकार गठित करने की प्रक्रिया चल रही है।
छह पूर्व प्रधानमंत्रियों पर निशाना
रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल की प्रमुख पार्टियों के दूसरी पीढ़ी के नेताओं ने दशकों से राजनीति पर हावी रहे छह पूर्व प्रधानमंत्रियों को जबरन रिटायर करने का प्रस्ताव रखा है। इन नेताओं में केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल प्रचंड, माधव कुमार नेपाल, झालानाथ खनल और डॉ. बाबूराम भट्टाराई शामिल हैं।
इन नेताओं पर आरोप है कि इन्होंने लंबे समय तक सत्ता पर कब्जा बनाए रखा, जबकि नए नेतृत्व को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया। इसलिए, अब इनसे सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की मांग की जा रही है। खबरों के अनुसार, इनसे संयुक्त बयान जारी कर रिटायरमेंट की घोषणा करने का दबाव डाला जा रहा है।
अंतरिम सरकार पर सहमति
इस राजनीतिक संकट के बीच, नेपाल में नई अंतरिम सरकार के गठन पर सहमति बन रही है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने की तैयारी है। राष्ट्रपति कार्यालय शीतल निवास ने उनके स्वागत की औपचारिक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में अंतरिम सरकार स्थिरता बहाल कर सकती है और जनता का विश्वास जीतने में मददगार साबित होगी।
राजनीतिक भविष्य की नई दिशा
नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल, माओवादी केंद्र और यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी के युवा नेता इस बदलाव को देश की राजनीति में नई दिशा के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि अब देश को पुराने नेताओं से आगे बढ़ाकर नई पीढ़ी के नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।
इसे भी पढ़े- पवन खेड़ा की कोर्ट में होगी पेशी, ट्रांजिट रिमांड पर असम ले जाएगी पुलिस
