पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने सभी भारतीयों को ईरान की यात्रा से बचने और वहां मौजूद लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से देश छोड़ने की सलाह दी है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब ईरान और इजराइल के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।
भारतीय नागरिकों को सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह
दूतावास ने अपने बयान में कहा है कि क्षेत्र में तेजी से बदलते घटनाक्रम और बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारतीय नागरिक अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। यह सलाह छात्रों, व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों समेत सभी भारतीय नागरिकों पर लागू होती है।
जानकारी के अनुसार, मौजूदा संकट के दौरान भारत की ओर से यह आठवीं आधिकारिक चेतावनी जारी की गई है। अनुमान है कि करीब 7,500 भारतीय नागरिक अभी भी ईरान में मौजूद हैं। इससे पहले भारत ने आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते हजारों भारतीयों को सुरक्षित निकालने में सहायता की थी।
भारत ने हिंसा पर जताई चिंता
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में हुए हालिया हमलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मंत्रालय के अनुसार, लंबे समय से चल रहे इस टकराव के कारण मानवीय संकट गहराया है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की है ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम की जा सके।
मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई से बढ़ा तनाव
हालात तब और गंभीर हो गए जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया कि उसने इजराइल के कई सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। ईरान ने इसे लेबनान और बेरूत में इजराइली कार्रवाइयों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया।
इसके बाद इजराइल ने पश्चिमी और मध्य ईरान के कई सैन्य ठिकानों और औद्योगिक परिसरों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। तेहरान, कराज, तबरीज और इस्फहान समेत कई शहरों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं। सुरक्षा कारणों से तेहरान के प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
संघर्षविराम की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
हालिया घटनाओं ने अप्रैल में हुए संघर्षविराम की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद भारत ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और ईरान छोड़ने की सलाह दी थी।
विश्लेषकों का मानना है कि उस समय व्यक्त की गई आशंकाएं अब धीरे-धीरे सच साबित होती दिखाई दे रही हैं, क्योंकि क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
अमेरिका की चिंता, इजराइल और ईरान आमने-सामने
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया घटनाक्रम को चिंताजनक बताते हुए कहा कि बढ़ते हमले शांति वार्ता की संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते पर लौटने का आग्रह किया है। हालांकि, इजराइल ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह किसी भी हमले का कड़ा जवाब देगा। वहीं ईरान ने भी चेतावनी दी है कि उसके हितों पर हमले जारी रहे तो प्रतिक्रिया और अधिक व्यापक हो सकती है।
हूती और हिजबुल्लाह की सक्रियता से बढ़ी क्षेत्रीय अस्थिरता
क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने में हिजबुल्लाह और यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। हूती समूह ने लाल सागर में इजराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर दिख रहा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। इसके अलावा लाल सागर और स्वेज नहर के समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग कंपनियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
कई देश कर रहे हैं मध्यस्थता की कोशिश
तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये समेत कई देश कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हुए हैं। विभिन्न देशों द्वारा अमेरिका, इजराइल और ईरान से संयम बरतने तथा सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की जा रही है।
क्या बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है पश्चिम एशिया?
मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय दूतावास की चेतावनी को केवल एहतियाती कदम नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और लाखों प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से भारत सरकार लगातार अपने नागरिकों को सतर्क रहने और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दे रही है।
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