नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। शुक्रवार शाम सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही देश में धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं। लेकिन इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस समय कहां हैं।
संसद घेराव और इस्तीफ़ा
पिछले मंगलवार को जेन-जेड प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन पर कब्ज़ा कर लिया था और ओली के निजी आवास में आगज़नी की। इसके बाद ओली ने इस्तीफ़ा दे दिया। सेना का एक हेलिकॉप्टर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गया। बाद में उन्होंने एक पत्र जारी कर कहा कि भारत-विरोधी रुख और विवादित मुद्दों पर उनके अडिग रहने के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
ओली का दावा और रहस्य
ओली ने कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल के हिस्से हैं और भगवान श्रीराम की जन्मभूमि नेपाल है। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर समझौता न करना ही उनकी विदाई का कारण बना। हालांकि, उनके वास्तविक ठिकाने पर रहस्य बरकरार है। कुछ रिपोर्टें उन्हें शिवपुरी में सेना की सुरक्षा में बताती हैं, जबकि अन्य के मुताबिक वे विदेश चले गए हैं। सेना ने भी उनके ठिकाने की जानकारी से इंकार किया है।
भारत-विरोधी रुख और असली कारण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओली भारत पर दोषारोपण करके सहानुभूति जुटाना चाहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि उनका कार्यकाल भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और चीन पर अत्यधिक निर्भरता से भरा रहा। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव ने नेपाल पर कर्ज़ का बोझ बढ़ाया, जबकि विकास ठप रहा।
आगे की राह
नेपाल को अब ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है जो संतुलन और व्यावहारिक नीतियों के साथ आगे बढ़े। भावनात्मक राष्ट्रवाद और जिद की राजनीति ने केवल अस्थिरता बढ़ाई है। कार्की की अगुवाई में नेपाल के लिए यह मौका है कि वह वास्तविक विकास की दिशा में आगे बढ़े।
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