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कौन बनेगा इस साल का नोबेल विजेता? चयन प्रक्रिया में छिपे हैं कई रहस्य

हर साल अक्टूबर में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा वैश्विक उत्साह का केंद्र बनती है। विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को यह सम्मान दिया जाता है। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सुर्खियों में है, जिन्होंने कई बार खुद को इस पुरस्कार का हकदार बताया है।

नोबेल पुरस्कारों का संचालन और चयन

नोबेल फाउंडेशन इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का संचालन करता है, जो चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है। विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग संस्थाएं जिम्मेदार हैं:

  • भौतिकी, रसायन विज्ञान, अर्थशास्त्र: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज
  • चिकित्सा: कैरोलिन्स्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली
  • साहित्य: स्वीडिश एकेडमी
  • शांति: नॉर्वे की संसद द्वारा नियुक्त नोबेल समिति
  • हर क्षेत्र में विशेषज्ञ योग्य उम्मीदवारों का चयन करते हैं।

Nobel चयन प्रक्रिया: एक नजर

नोबेल पुरस्कारों का चयन एक गोपनीय और लंबी प्रक्रिया से गुजरता है, जो सितंबर में नामांकन से शुरू होती है। केवल चुनिंदा लोग, जैसे राष्ट्रपति, संसद सदस्य, विश्वविद्यालय प्रोफेसर, पूर्व नोबेल विजेता और समिति के सदस्य, नामांकन कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सलाह से उम्मीदवारों की जांच होती है। महीनों की चर्चा और विश्लेषण के बाद, समिति साधारण बहुमत से विजेता चुनती है।

गोपनीयता का महत्व

नोबेल फाउंडेशन चयन प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय रखता है। नामांकन करने वालों की जानकारी 50 साल तक सार्वजनिक नहीं होती। यह गोपनीयता राजनीतिक या सामाजिक दबाव से मुक्त निर्णय सुनिश्चित करती है। कई बार विजेताओं को भी नहीं पता कि उन्हें किसने नामांकित किया।

शांति पुरस्कार के लिए पात्रता

नोबेल शांति पुरस्कार केवल जीवित व्यक्तियों या सक्रिय संगठनों को दिया जाता है। नामांकन के लिए पात्र व्यक्तियों में संसद सदस्य, विश्वविद्यालय प्रोफेसर, पूर्व विजेता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल हैं। हर साल 300 से अधिक नामांकन आते हैं, लेकिन अंतिम रूप से केवल एक या दो विजेता चुने जाते हैं। 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा का इंतजार बेसब्री से हो रहा है। क्या ट्रंप का दावा इस बार हकीकत बनेगा? यह जल्द ही पता चलेगा।

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