अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि उन्होंने 7 युद्ध खत्म किए और 8वां गाजा में समाप्त करने वाले हैं। उन्होंने खुद को 2025 नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार बताया, लेकिन नॉर्वे की नोबेल कमेटी ने यह सम्मान वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक नेता मारिया कुरिना माचाडो को दिया। ट्रंप ने इसे अमेरिका का ‘अपमान’ करार दिया।
माचाडो को क्यों चुना गया?
मारिया कुरिना माचाडो को वेनेजुएला में तानाशाही के खिलाफ संघर्ष और लोकतंत्र की बहाली के लिए सम्मानित किया गया। नोबेल कमेटी ने उनके प्रयासों को ‘लंबे समय तक टिकाऊ शांति और लोकतांत्रिक बदलाव’ का प्रतीक बताया। माचाडो ने निकोलस मादुरो के शासन के खिलाफ वर्षों से आवाज उठाई है।
ट्रंप के दावों पर विवाद क्यों?
ट्रंप ने इजरायल-ईरान, भारत-पाकिस्तान, आर्मीनिया-अजरबैजान जैसे 8 संघर्षों को खत्म करने का दावा किया, लेकिन ये दावे विवादित हैं। कई देशों ने इन पर चुप्पी साधी, तो कुछ ने इन्हें ‘राजनीतिक प्रचार’ बताया। नॉर्वेजियन विशेषज्ञ नीना ग्रेगर ने कहा, “ट्रंप के प्रयास अस्थायी और स्वार्थी हैं।”
नोबेल कमेटी ने ट्रंप को क्यों ठुकराया?
- देर से आई गाजा डील: कमेटी ने सोमवार को फैसला लिया, जबकि ट्रंप का गाजा शांति ऐलान बाद में हुआ।
- पॉलिटिकल शो: विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप की डील्स लंबे समय तक टिकाऊ नहीं।
- तानाशाहों से नजदीकी: ट्रंप की पुतिन और अन्य तानाशाहों से दोस्ती उनके खिलाफ गई।
ट्रंप के समर्थकों का क्या कहना है?
इजरायल के पीएम नेतन्याहू, पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और कंबोडिया के पीएम हुन मानेट ने ट्रंप के लिए नॉमिनेशन भेजा, लेकिन ये डेडलाइन के बाद पहुंचे, इसलिए मान्य नहीं हुए।
भविष्य में ट्रंप की संभावनाएं
विश्लेषकों का कहना है कि अगर ट्रंप की गाजा शांति डील एक साल तक स्थायी रहती है, तो वे 2026 में नोबेल के दावेदार हो सकते हैं। प्रोफेसर इनगार्ड होल्म ने कहा, “ट्रंप को स्थायी और पारदर्शी डील्स साबित करनी होंगी।”
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