भारत ने दुनिया भर में मौजूद अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के माध्यम से चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीज़ा जारी करना फिर शुरू कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 2020 से चले आ रहे तनाव के बाद संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
एलएसी तनाव और वीज़ा निलंबन का पृष्ठभूमि
अप्रैल-मई 2020 में LAC पर शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद भारत ने चीनी नागरिकों के वीज़ा निलंबित कर दिए थे। इसके तुरंत बाद गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय जवान और कम से-कम चार चीनी सैनिकों की मौत ने रिश्तों को दशकों के सबसे खराब दौर में पहुँचा दिया। जुलाई 2024 में भारत ने सीमित स्तर पर पर्यटक वीज़ा बहाल किया था, लेकिन आवेदन केवल बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझू और हांगकांग स्थित भारतीय मिशनों तक सीमित थे।
वैश्विक दूतावासों से आवेदन शुरू—बिना औपचारिक घोषणा
सूत्रों के अनुसार, इस सप्ताह की शुरुआत में भारत ने दुनिया भर में सभी भारतीय दूतावासों में चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीज़ा खोल दिया। सरकार ने इसकी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि यह कदम हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच बनी सहमति का हिस्सा है।
जन-केंद्रित कदमों के जरिये संबंध सुधार
दोनों देशों ने संबंधों को स्थिर करने और विश्वास बहाल करने के लिए कई “जन-केन्द्रित” उपायों पर सहमति जताई है।
इनमें शामिल हैं:
- 2020 से बंद सीधी उड़ानों का अक्टूबर 2024 में पुनः आरंभ
- ग्रीष्मकाल में कैलाश-मानसरोवर यात्रा फिर शुरू करने पर सहमति
- विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों के लिए वीज़ा सुविधा में विस्तार
- राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में संयुक्त कार्यक्रम
दोनों देशों के रिश्तों पर क्या होगा प्रभाव?
राजनयिक सूत्रों का मानना है कि पर्यटक वीज़ा का वैश्विक स्तर पर पुनः प्रारंभ होना संकेत है कि दोनों देश शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में ‘पीपल-टू-पीपल कनेक्ट’ को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। आने वाले महीनों में व्यापार, यात्रा और सांस्कृतिक सहयोग की गति और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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