घर में रखा एलपीजी गैस सिलेंडर हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिलेंडर की भी एक तय वैधता होती है? देश में लाखों लोग रोज इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन इसकी एक्सपायरी डेट के बारे में अनजान रहते हैं। एक्सपायर सिलेंडर का उपयोग किसी भी समय गंभीर हादसे को जन्म दे सकता है। इसलिए इसकी वैधता जांचना बेहद जरूरी है।
जैसे खाद्य पदार्थ या दवाओं पर एक्सपायरी डेट लिखी होती है, वैसे ही हर एलपीजी सिलेंडर पर भी उसकी वैधता दर्ज रहती है। फर्क बस इतना है कि इसे लोग गंभीरता से नहीं देखते। एक्सपायर सिलेंडर कमजोर हो सकता है, जिस वजह से उसमें गैस लीकेज या फटने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सिलेंडर की डेट हमेशा जांचना चाहिए।
एलपीजी सिलेंडर की एक्सपायरी किसी स्टीकर पर नहीं, बल्कि सीधे उसके बॉडी पर ही लिखी होती है। अगर आपने ध्यान दिया हो, तो सिलेंडर के ऊपर या नीचे की रिंग पर A-27, B-28, C-29 या D-30 जैसे कोड छपे होते हैं। यही कोड उसकी पूरी एक्सपायरी बताते हैं।
यही कोड उसकी पूरी एक्सपायरी बताते हैं
इन कोड को समझना बेहद आसान है। कोड में मौजूद अक्षर, सिलेंडर की वैधता की तिमाही बताते हैं—
- A = जनवरी से मार्च
- B = अप्रैल से जून
- C = जुलाई से सितंबर
- D = अक्टूबर से दिसंबर
यानी किसी सिलेंडर पर अगर A-27 लिखा है, तो इसका मतलब है कि यह जनवरी से मार्च 2027 के बीच एक्सपायर होगा। इसी तरह, कोड में मौजूद नंबर उस साल को दर्शाते हैं जब इसकी वैधता खत्म होती है। उदाहरण के तौर पर D-30 का अर्थ है कि यह सिलेंडर अक्टूबर से दिसंबर 2030 की अवधि में एक्सपायर हो जाएगा।
यह कोडिंग सिस्टम पूरे भारत में एक जैसा है, जिससे उपभोक्ता बिना किसी तकनीकी ज्ञान के भी इसे आसानी से समझ सकते हैं। अगर किसी सिलेंडर पर B-28 लिखा मिले, तो यह साफ है कि यह सिलेंडर अप्रैल से जून 2028 तक सुरक्षित माना जाता है।
एक्सपायरी डेट निकलने के बाद सिलेंडर का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। यदि तारीख पास है या गुजर चुकी है, तो तुरंत गैस एजेंसी से नया सिलेंडर मंगवाना चाहिए ताकि किसी भी जोखिम से बचा जा सके। थोड़ी सी सतर्कता आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
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