Wednesday, April 1, 2026
HomePoliticalप्रबंध समिति क्यों नहीं बताती, बुल्लेशाह पाकिस्तान में दफना दिए हुए,फिर मसूरी...

प्रबंध समिति क्यों नहीं बताती, बुल्लेशाह पाकिस्तान में दफना दिए हुए,फिर मसूरी में कैसे पहुंचे? 

खबर संसार देहरादून.उत्तराखंड प्रबंध समिति क्यों नहीं बताती, बुल्लेशाह पाकिस्तान में दफना दिए हुए,फिर मसूरी में कैसे पहुंचे? मसूरी बुल्लेशाह मजार प्रकरण, उर्स के बहाने होती है लाखों की चंदा वसूली. जी हाbदेहरादूनमसूरी स्थित जंगल के बीच बनी बुल्लेशाह की अवैध मजार सुर्खियों में है, खास बात ये है उक्त मजार को बुल्लेशाह की मजार बताने वाली प्रबंध समिति अभी तक ये नहीं बता पाई है कि उनके बाबा पाकिस्तान से मसूरी कैसे पहुंचे? बताया जाता है कि मजार के खादिमों ने स्थानीय हिंदुओं को आगे कर एक समिति बनाई हुई है जोकि उर्स के बहाने लाखों का चंदा एकत्र करती है जिसका कोई हिसाब किताब कहीं भी सार्वजनिक नहीं किया जाता।

उत्तराखंड प्रबंध समिति क्यों नहीं बताती, बुल्लेशाह पाकिस्तान में दफना दिए हुए,फिर मसूरी में कैसे पहुंचे? 

मसूरी में जिस परिसर में उक्त अवैध मजार है वो एक ईसाई स्कूल है, और दिलचस्प बात ये है कि यहां कथित बुल्लेशाह के साथ साथ एक साथ कई अवैध मजारे भी बना दी गई है जिसके बारे में मजार समिति ने अभी तक मुंह नहीं खोला है कि वो किसकी है ? हिंदुत्व निष्ट संगठनों का कहना है कि समाज को गुमराह करने वाले समिति के लोग दरअसल कालनेमि है।

दरअसल बाबा बुल्लेशाह नाम का एक ही फकीर सूफी कवि थे जोकि पाकिस्तान में दफनाए गए थे

दरअसल बाबा बुल्लेशाह नाम का एक ही फकीर सूफी कवि थे जोकि पाकिस्तान में दफनाए गए थे।बाबा बुल्लेशाह के बारे में कहा जाता है कि वो नास्तिक थे और खुदा को या ईश्वर को नहीं मानते थे,उनकी सूफी कविताएं गीत आज भी पाकिस्तान भारत के पंजाब क्षेत्र में गाए जाते है।बाबा बुले शाह के बारे में बताया जाता है कि उनके प्रथम आध्यात्मिक गुरु लाहौर के सूफी मुर्शिद शाह इनायत कादिरी थे। वे एक रहस्यवादी कवि थे और सर्वत्र उन्हें “पंजाबी ज्ञानोदय का जनक” माना जाता है।

उनके प्रथम आध्यात्मिक गुरु लाहौर के सूफी मुर्शिद शाह इनायत कादिरी

देश दुनिया से जहां बड़ी संख्या में उनके चाहने वाले जाते है। बुल्लेशाह मुख्यतः प्रेम पर विश्वास रखते थे इस लिए उनके। सूफियान गीतों में उन्होंने ख़ुदा से पहले, ईश्वर से पहले प्रेम को चुना।सवाल ये है जब बुल्लेशाह पाकिस्तान के कसूर कस्बे में दफना दिए गए है तो मसूरी में उनके नाम की मजार कैसे बन गई ? उल्लेखनीय है पिरान कलियर की रुड़की में ख्वाजा गरीब नवाज की अजमेर में एक ही मजार या दरगाह है।यानि सूफी फकीरों की एक ही स्थान पर मजार या दरगाह हो सकती है, फिर ये बुल्लेशाह मसूरी में कहां से आए ?मसूरी में बुल्लेशाह की जहां अवैध मजार बताई जा रही है वहां आसपास एक दर्जन अवैध मजारे और भी बन गई है ये कैसे बनी क्यों बनी कब बनी ? इस बारे में मजार प्रबंध कोई जवाब नहीं दे रहा।बताया जाता है कि यहां बैठने वाले मुस्लिम खादिम हरी नीली चादरों,अगरबत्ती, मीठी गोली ,ताबीज और झाड़ फूंक का धंधा कर स्थानीय हिन्दू लोगों को गुमराह करते है।

मसूरी में बुल्लेशाह की जहां अवैध मजार बताई जा रही

मुस्लिम लोग यहां कम जाते है क्योंकि वो खुदा के अलावा किसी के आगे सर नहीं झुकाते।पिछले दिनों हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने उक्त अवैध मजार को तोड़ डाला था जिसके बाद यहां विवाद की स्थिति बन गई थी और प्रशासन को यहां सुरक्षा करनी पड़ी थी।बताया गया है कि बीजेपी से जुड़े कुछ लोग भी उक्त अवैध मजार की समिति में शामिल बताए जाते है। जिनपर संगठन नजर रखे हुए है। उधर जिला प्रशासन का कहना है कि अभी इस बारे में जांच पड़ताल की जा रही है कि ये धार्मिक संरचनाएं कैसे बन गई?इस बारे में बजरंग दल के नेताओं का कहना है कि ये अवैध मजारे है और लोगों को यहां बैठे लोग आस्था के नाम पर धोखा दे रहे है ये फर्जीवाड़ा देवभूमि में नहीं चलने दिया जायेगा।

बजरंग दल के नेताओं का कहना है कि ये अवैध मजारे है और लोगों को यहां बैठे लोग आस्था के नाम

कालनेमि है यहां के समिति और खादिम?विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि बुल्लेशाह पाकिस्तान में दफनाए गए यहां मसूरी कैसे पहुंचे ? यकीनन यहां समिति के लोग और खादिम सबसे बड़े कालनेमि है जोकि देवभूमि की जनता को गुमराह कर अपना धंधापानी चला रहे है। विहिप के मीडिया प्रभारी पंकज चौहान का दावा है कि उक्त अवैध मजारे फर्जी है और इनके नीचे कुछ नहीं है। इन्हें प्रशासन को हटा देना चाहिए ताकि देवभूमि की संस्कृति का संरक्षण हो सके।

RELATED ARTICLES
-Advertisement-spot_img
-Advertisement-spot_img
-Advertisement-spot_img
-Advertisement-spot_img

Most Popular

About Khabar Sansar

Khabar Sansar (Khabarsansar) is Uttarakhand No.1 Hindi News Portal. We publish Local and State News, National News, World News & more from all over the strength.