1 अप्रैल को भारत में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई। यह फैसला ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने लिया, जबकि सरकार ने साफ किया कि ये दरें बाजार आधारित होती हैं। बढ़ोतरी की वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन पर दबाव है। इसका असर मुख्य रूप से होटल, ढाबों और इंडस्ट्री पर पड़ेगा, न कि सीधे घरेलू उपभोक्ताओं पर।
कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम क्यों बढ़े?
सरकार के अनुसार, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें सरकार नियंत्रित नहीं करतीं, बल्कि ये पूरी तरह बाजार के आधार पर तय होती हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई प्रभावित
- वैश्विक सप्लाई का 20-30% हिस्सा प्रभावित
- सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव
घरेलू उपभोक्ताओं पर कितना असर?
सरकार का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडर की कुल LPG खपत में हिस्सेदारी 10% से भी कम है। इसलिए आम जनता की रसोई पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा।
ऑयल कंपनियों को भारी नुकसान
मौजूदा स्थिति में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां घरेलू सिलेंडर पर नुकसान झेल रही हैं।
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- प्रति सिलेंडर लगभग ₹380 का नुकसान
- मई तक कुल नुकसान ₹40,484 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान
- पिछले साल कुल ₹60,000 करोड़ नुकसान
- सरकार और कंपनियों ने बराबर बोझ उठाया
अंतरराष्ट्रीय तुलना
सरकार ने अन्य देशों से तुलना करते हुए बताया:
- पाकिस्तान: ₹1046
- श्रीलंका: ₹1242
- नेपाल: ₹1208
नए रेट क्या हैं?
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1 अप्रैल से नए कमर्शियल LPG सिलेंडर रेट:
- दिल्ली: ₹2078.50 (पहले ₹1883)
- कोलकाता: ₹2208.00
- मुंबई: ₹2031.00
- चेन्नई: ₹2246.50
👉 1 मार्च से अब तक कुल ₹310 की बढ़ोतरी हो चुकी है।
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- 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर ₹195.50 महंगा
- कीमतें बाजार के आधार पर तय
- घरेलू उपभोक्ताओं पर सीमित असर
- अंतरराष्ट्रीय संकट से बढ़ी कीमतें
- ऑयल कंपनियां घाटे में
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