महाशिवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 15 फरवरी की शाम 5:04 बजे से प्रारंभ होगा। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार 300 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जब कई शुभ ग्रह योग एक साथ बनेंगे। विद्वानों के अनुसार इस दिन की गई पूजा, व्रत और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
300 साल बाद बन रहे शुभ योग
इस बार कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग बन रहे हैं। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात योग भी उपस्थित रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इतने शुभ योग एक साथ बनना अत्यंत दुर्लभ है, जो साधना और सिद्धि के लिए विशेष फलदायी रहेगा।
तिथि और शुभ मुहूर्त
चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी शाम 5:04 बजे से 16 फरवरी शाम 5:34 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी रात्रि में होने के कारण 15 फरवरी को ही व्रत और पूजन किया जाएगा।
निशीथ काल पूजा 16 फरवरी रात 12:09 से 1:01 बजे तक अत्यंत शुभ रहेगी।
चार प्रहर पूजा का विशेष महत्व
महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों में पूजा का विधान है—
प्रथम: 6:11 से 9:22 बजे
द्वितीय: 9:23 से 12:34 बजे
तृतीय: 12:35 से 3:46 बजे
चतुर्थ: 3:46 से 6:59 बजे
धन-प्रतिष्ठा के उपाय
5 बिल्वपत्रों पर ‘राम’ लिखकर अर्पित करने से धन कष्ट दूर होते हैं।
3 बिल्वपत्रों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर चढ़ाने से पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
अभिषेक से विशेष फल
दूध – मानसिक शांति
गन्ने का रस – धन लाभ
सरसों का तेल – शत्रु नाश
गिलोय रस – आरोग्य
गंगाजल – आध्यात्मिक उन्नति
महाशिवरात्रि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का दुर्लभ अवसर है। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकती है।
पूजा करते समय रखें ये 5 सावधानियां
- पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
- शिवलिंग पर तुलसी पत्र न चढ़ाएं, केवल बिल्वपत्र ही अर्पित करें।
- केतकी का फूल भगवान शिव को अर्पित न करें, यह वर्जित माना गया है।
- बिल्वपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्तियां टूटी या कटी हुई न हों।
- पूजा में चढ़ाया गया प्रसाद या जल अनादरपूर्वक इधर-उधर न रखें, श्रद्धा बनाए रखें।
ऐसे करें महाशिवरात्रि पूजा
- सबसे पहले शिवलिंग को गंगाजल या स्वच्छ जल से स्नान कराएं।
- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
- बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
- दीपक जलाकर धूप-आरती करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
- अंत में शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ कर क्षमा प्रार्थना करें।
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