लगातार तीन कारोबारी सत्रों की मजबूती के बाद सप्ताह के चौथे दिन भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। शुरुआती बढ़त के बावजूद दोपहर बाद बाजार में बिकवाली हावी हो गई और निवेशकों को करीब 7.55 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स करीब 1400 अंक तक लुढ़क गया। अंत में BSE Sensex 1236 अंक गिरकर 82,498 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं NIFTY 50 लगभग 400 अंक फिसलकर 25,454 के स्तर पर बंद हुआ। बीएसई का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 464 लाख करोड़ रुपये रह गया।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा दबाव?
बैंकिंग, ऑटो, मेटल और एफएमसीजी सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई। हैवीवेट शेयरों में कमजोरी ने बाजार पर सबसे ज्यादा असर डाला।
गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे:
- Reliance Industries
- HDFC Bank
- ICICI Bank
- Kotak Mahindra Bank
- Larsen & Toubro
- Hindustan Unilever
- ITC Limited
हालांकि आईटी सेक्टर से थोड़ी राहत मिली। Infosys और Tata Consultancy Services में हल्की तेजी रही, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
वैश्विक संकेतों का असर
भारतीय बाजार पर अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा प्रभाव पड़ता है। इस समय निवेशक भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार और ब्याज दरों की दिशा को लेकर सतर्क हैं। अनिश्चित माहौल में निवेशक इक्विटी से पैसा निकालकर सोना और सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका दबाव उभरते बाजारों पर ज्यादा दिखता है, जिनमें भारत भी शामिल है। एशियाई बाजारों में हालांकि मजबूती रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 3% चढ़ा, जबकि जापान का Nikkei 225 लगभग 1% मजबूत बंद हुआ।
कच्चे तेल और संस्थागत निवेशकों की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude 0.37% बढ़कर 70.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
हालांकि, संस्थागत निवेशकों की ओर से खरीदारी का रुख सकारात्मक रहा।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 1,154.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
- घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 440.34 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
इसके बावजूद हैवीवेट शेयरों में बिकवाली के चलते बाजार की तेजी थम गई।
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