वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्नत AI मॉडल Claude Mythos और उससे जुड़े संभावित साइबर सुरक्षा जोखिमों पर विस्तार से चर्चा की गई। वित्त मंत्रालय के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट के अनुसार, मंत्री ने सभी हितधारकों को इस नए AI मॉडल के प्रभाव को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। मंत्रालय ने संकेत दिया कि Claude Mythos कई नए और जटिल साइबर खतरों को जन्म दे सकता है, जिनसे निपटने के लिए बैंकों के बीच मजबूत समन्वय और उच्च स्तर की सतर्कता जरूरी होगी।
क्या है Claude Mythos AI?
Claude Mythos, Anthropic कंपनी द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल है। इसे अब तक के सबसे शक्तिशाली साइबर सुरक्षा AI टूल्स में गिना जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, यह AI मॉडल बैंकिंग सिस्टम में मौजूद छोटी से छोटी तकनीकी कमजोरियों को भी पहचान सकता है। खास बात यह है कि यह पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउज़र के कोड में छिपी खामियों का भी पता लगाने में सक्षम है, जिन्हें सामान्य तौर पर इंसान आसानी से नहीं खोज पाता। Anthropic का मानना है कि अगर इस तकनीक को बड़े स्तर पर सार्वजनिक कर दिया गया, तो यह किसी भी सामान्य व्यक्ति को उन्नत हैकिंग क्षमता उपलब्ध कराने जैसा होगा।
क्यों बढ़ी चिंता? संभावित खतरे क्या हैं
Claude Mythos की ताकत ही इसकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस AI तक फिलहाल सीमित पहुंच ही दी गई है और लगभग 40 चुनिंदा कंपनियों—जैसे Amazon, Microsoft और Google—को ही इसका उपयोग करने की अनुमति है। हालांकि, कुछ अनधिकृत उपयोगकर्ताओं द्वारा इस सिस्टम तक पहुंच बनाने की खबरें सामने आई हैं। इससे साइबर हमलों और डेटा चोरी का खतरा और बढ़ गया है। सरकार ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी साइबर सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साझा करें।
ग्राहकों के डेटा और बैंकिंग सिस्टम पर खतरा
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस तरह के उन्नत AI मॉडल का दुरुपयोग कर बैंकिंग सिस्टम में सेंध लगाई जा सकती है। इसके जरिए न केवल वित्तीय धोखाधड़ी संभव है, बल्कि ग्राहकों की निजी जानकारी भी खतरे में पड़ सकती है। इसी वजह से बैंकों को रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आपसी सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
वैश्विक स्तर पर भी बढ़ी सतर्कता
भारत ही नहीं, बल्कि अन्य देश भी Claude Mythos जैसे AI मॉडल पर नजर बनाए हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में भी सरकार ने वॉल स्ट्रीट के बड़े बैंकों के साथ इस विषय पर बातचीत शुरू की है। साथ ही, व्हाइट हाउस अपनी विभिन्न एजेंसियों में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस तकनीक के संभावित उपयोग पर विचार कर रहा है।
Claude Mythos AI जहां साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि है, वहीं इसका दुरुपयोग गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। ऐसे में सरकार और वित्तीय संस्थानों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे समय रहते अपनी सुरक्षा रणनीतियों को मजबूत करें और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार रहें।
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