HomeBusinessमहंगाई का खतरा! तेल 136 डॉलर पार, क्या सरकार लेगी बड़ा फैसला?

महंगाई का खतरा! तेल 136 डॉलर पार, क्या सरकार लेगी बड़ा फैसला?

खाड़ी क्षेत्र में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है। कुछ ही हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 93% की तेज उछाल दर्ज की गई है, जिससे यह 136.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने भारत की प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, एचपीसीएल, बीपीसीएल और रिलायंस—की वित्तीय स्थिति पर सीधा असर डाला है। मुनाफा घटने का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।


पेट्रोल-डीजल कीमतों पर सरकार की रणनीति

वैश्विक स्तर पर कई देशों ने ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, लेकिन भारत में अभी तक पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं। इसका सीधा असर तेल कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा है, क्योंकि वे बढ़ी हुई लागत को उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा पा रही हैं। सरकार फिलहाल राजस्व संतुलन बनाए रखने के कारण 31 मार्च तक किसी बड़े फैसले के मूड में नहीं दिख रही है।


चुनावी माहौल में फैसले टले

देश के चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सरकार ईंधन कीमतों में बदलाव का जोखिम नहीं लेना चाहती। मतदान प्रक्रिया 29 अप्रैल को समाप्त होगी, जिसके बाद ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।


अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ता दबाव

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 3.7 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच चुकी हैं।ब्रेंट क्रूड में 40% से अधिक और रूस के यूराल्स क्रूड में 50% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत के लिए चिंता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि ओमान, दुबई और ब्रेंट के दाम कुछ ही दिनों में 70.9 डॉलर से बढ़कर 136 डॉलर के पार पहुंच गए।


होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़

इस पूरे संकट के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया की लगभग 20% ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित किए जाने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत के लिए स्थिति और गंभीर है, क्योंकि उसकी करीब 60% ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते पर निर्भर करती है।


अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती है, तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है।

  • व्यापार घाटा 80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है
  • चालू खाते का घाटा बढ़ने की आशंका
  • रुपये पर दबाव बढ़ेगा
  • महंगाई में तेजी आएगी

रेटिंग एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि लंबे समय तक चला संकट ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग को प्रभावित कर सकता है।हालात संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय है। इसका असर आम जनता से लेकर उद्योगों तक महसूस किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भारत इस वैश्विक ऊर्जा संकट से खुद को बचा पाएगा या फिर इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था को हिला देगा?


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