सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज उस FIR से जुड़ा है, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने मामले की सुनवाई की। खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि इस केस में हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि मामला मुख्य रूप से मानहानि से जुड़ा है और गिरफ्तारी जरूरी नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि एक सार्वजनिक व्यक्ति होने के नाते खेड़ा के फरार होने की संभावना नहीं है और वे जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
सिंघवी ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में कहा कि मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयानों से गिरफ्तारी की आशंका बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बयान बेहद आपत्तिजनक थे और उनमें खेड़ा को जेल भेजने जैसी बातें कही गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि असम पुलिस के 50-70 जवान दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित खेड़ा के घर पहुंचे, जिससे कार्रवाई का तरीका सवालों के घेरे में आता है।
हाई कोर्ट के फैसले पर भी उठे सवाल
सिंघवी ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 339 का उल्लेख न तो शिकायत में था और न ही FIR में। इसके अलावा, हाई कोर्ट द्वारा शिकायतकर्ता को “निर्दोष महिला” कहने पर भी उन्होंने सवाल उठाया और कहा कि इससे ट्रायल से पहले ही राय बनती है।
असम सरकार की क्या दलील रही?
असम सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए दस्तावेज नकली और जाली हैं। सरकार का तर्क है कि हिरासत में पूछताछ जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये दस्तावेज किसने बनाए, इसमें किसकी मदद शामिल थी और क्या इसमें कोई विदेशी कनेक्शन भी है।
मामला क्यों बना विवाद का कारण?
यह पूरा विवाद उन आरोपों से जुड़ा है, जिसमें पवन खेड़ा ने दावा किया था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनके वित्तीय हित जुड़े हुए हैं। इन्हीं आरोपों के बाद यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में आ गया।
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