पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं। अरब मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ बातचीत और संभावित समझौते के लिए तैयार हो गए हैं।
इजरायली मीडिया आउटलेट के हवाले से आई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी मध्यस्थ स्टीव विटकॉफ के बीच हाल ही में अहम बातचीत हुई है। इस वार्ता को ईरान के शीर्ष अधिकारियों की मंजूरी भी मिली थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप का बड़ा बयान
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार के लिहाज से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द ही खुल सकता है। ट्रंप ने यह संकेत भी दिया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का संयुक्त प्रबंधन अमेरिका और ईरान द्वारा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “इसका कंट्रोल साझा होगा, चाहे मौजूदा या अगला अयातुल्ला ही क्यों न हो।”
ईरान ने पहले किया था बातचीत से इनकार
हालांकि इससे पहले ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से साफ इनकार किया था। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि पिछले 24 दिनों में अमेरिका-इजराइल के साथ जारी संघर्ष के दौरान तेहरान ने वाशिंगटन से कोई बातचीत नहीं की। इसके उलट, ट्रंप ने दावा किया था कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई है और इसमें “महत्वपूर्ण सहमति के बिंदु” सामने आए हैं।
हमलों पर 5 दिन की रोक, कूटनीति को मौका
तनाव कम करने के प्रयासों के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के ऊर्जा और बिजली ठिकानों पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का निर्देश दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल परिवहन और क्षेत्रीय स्थिरता पर साफ दिख रहा है।
क्या 9 अप्रैल को खत्म होगा युद्ध?
इजरायली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए 9 अप्रैल की संभावित तारीख तय की है। बताया जा रहा है कि ट्रंप इस महीने के अंत में इजरायल दौरे पर जाने वाले हैं, जहां उन्हें राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा जाएगा। ऐसे में युद्ध समाप्त होने की यह समयसीमा कूटनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
बढ़ती चिंता: वैश्विक असर
पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष का प्रभाव खाड़ी क्षेत्र से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। ऊर्जा आपूर्ति में बाधा, बुनियादी ढांचे को नुकसान और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता लगातार बढ़ रही है।
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