अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 40 दिनों से चल रहे भीषण युद्ध पर आखिरकार ब्रेक लग गया है। दोनों देशों ने 14 दिनों के सीजफायर पर सहमति बनाई है। यह समझौता तब हुआ जब तनाव चरम पर था और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ रही थी। पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के बाद यह डील संभव हुई। समझौते के तहत ईरान अपनी शर्तों पर स्ट्रेट को खोलने और अमेरिका बातचीत के लिए तैयार हुआ।
सीजफायर की बड़ी बातें
- 40 दिन के युद्ध के बाद 14 दिन का युद्धविराम
- होर्मुज स्ट्रेट को सीमित रूप से खोलने पर सहमति
- ईरान की शर्तों पर सुरक्षित आवाजाही
- अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई को ‘सफल’ बताया
पाकिस्तान की अहम भूमिका
सीजफायर से कुछ घंटे पहले अमेरिका ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने मध्यस्थता की।
- ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दोनों का जिक्र किया
- 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में औपचारिक वार्ता प्रस्तावित
ईरान की शर्तें क्या हैं
ईरान ने साफ कहा कि अगर उस पर हमले पूरी तरह बंद होते हैं, तो वह भी सैन्य कार्रवाई रोक देगा।
- 2 हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट से नियंत्रित आवाजाही
- ईरानी सेना की निगरानी में समुद्री मार्ग
ईरान का 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव
- आर्थिक प्रतिबंध हटाना
- अमेरिकी सेना की क्षेत्र से वापसी
- होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखना
- नुकसान का मुआवजा
- यूरेनियम संवर्धन का अधिकार
- UNSC प्रस्ताव समाप्त करना
- भविष्य में हमले की गारंटी नहीं
- IAEA प्रस्ताव खत्म करना
- क्षेत्रीय संघर्षों का अंत
ट्रंप का बयान और अमेरिका का रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव बातचीत के लिए व्यावहारिक आधार है।
- 14 दिन के सीजफायर की पुष्टि
- व्हाइट हाउस ने इसे ‘रणनीतिक जीत’ बताया
- ईरान ने भी समझौते को अपनी जीत बताया
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