होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और अन्य ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा। इसके साथ ही भारत समेत कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है।
रूसी तेल खरीद पर खत्म हुई अमेरिकी छूट
ट्रंप प्रशासन ने रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई अस्थायी छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही यह राहत अवधि अब समाप्त हो चुकी है। इस फैसले को भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान भारत लगातार रूस से तेल आयात कर रहा था।
वैश्विक सप्लाई पर पड़ सकता है असर
रूस दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल निर्यातक देशों में शामिल है। ऐसे में अमेरिकी निर्णय के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देगा। पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन खर्च बढ़ सकता है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद लगाए गए थे प्रतिबंध
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के तेल कारोबार पर कई सख्त प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि मार्च 2026 में ईरान युद्ध और होर्मुज ब्लॉकेड के कारण वैश्विक तेल संकट गहराने लगा था। उस दौरान तेल की कमी को देखते हुए ट्रंप सरकार ने रूसी तेल खरीद के लिए अस्थायी छूट दी थी। बाद में इस राहत को 16 मई 2026 तक बढ़ाया गया था। यह छूट केवल उन तेल खेपों पर लागू थी जिन्हें पहले ही टैंकरों पर लोड किया जा चुका था।
यूरोपीय देशों के दबाव में लिया गया फैसला
रिपोर्ट्स के अनुसार कई यूरोपीय देश लगातार इस छूट का विरोध कर रहे थे। उनका तर्क था कि रूसी तेल की बिक्री से मिलने वाली कमाई रूस के युद्ध फंड को मजबूत कर रही है। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद ट्रंप प्रशासन ने शनिवार को यह छूट समाप्त करने का फैसला लिया।
भारत ने बढ़ाया था रूसी तेल आयात
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट के बाद भारत ने मार्च 2026 में रूस से तेल आयात में बड़ी बढ़ोतरी की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौरान भारत ने प्रतिदिन करीब 4.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया था।
इसमें लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा रूस से आया था, जबकि मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई करीब 61 फीसदी तक घट गई थी। अप्रैल 2026 में भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना रहा। अप्रैल महीने में भारत ने रूस से करीब 1.57 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, हालांकि यह मार्च की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम था।
भारत में फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
हाल ही में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की गई थी। इसके अलावा सीएनजी के दाम भी बढ़ाए गए थे। अब ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो भारत में ईंधन की कीमतों में फिर इजाफा हो सकता है। इसका असर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और उद्योगों पर भी देखने को मिल सकता है।
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