पंजाब की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की संभावित कांग्रेस वापसी को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ कैप्टन अमरिंदर सिंह ही नहीं, बल्कि उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग भी कांग्रेस में दोबारा शामिल होने की इच्छा रखता है। जानकारों का मानना है कि इस संबंध में किसी भी समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है।
भाजपा में सीमित होती भूमिका से बढ़ी नाराजगी
सूत्रों का दावा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके करीबी नेता लंबे समय से भाजपा में खुद को सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। हालांकि, यह असंतोष सार्वजनिक मंचों की बजाय निजी बातचीत तक ही सीमित रहा।
हाल ही में केवल सिंह ढिल्लों को भाजपा पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने और नगर निगम चुनावों के नतीजों के बाद यह भावना और मजबूत हुई है। माना जा रहा है कि कैप्टन को लगने लगा है कि भाजपा में उनकी राजनीतिक भूमिका और प्रभाव पहले की तुलना में काफी सीमित हो गया है।
केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति पर जताई नाराजगी
जानकारी के अनुसार, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कुछ पत्रकारों से बातचीत के दौरान केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति पर अपनी असहमति जाहिर की। उनका कहना था कि इस फैसले से पहले उनसे कोई राय-मशविरा नहीं किया गया। जबकि राजनीतिक हलकों में यह धारणा रही है कि ढिल्लों की नियुक्ति में उनकी भूमिका रही होगी।
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बढ़ी चिंता
कैप्टन खेमे का मानना है कि पंजाब में भाजपा के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बिना सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं होगा। उनके सहयोगियों का कहना है कि भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा अपने दम पर सरकार बनाने के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अमरिंदर परिवार को भी पटियाला की शहरी विधानसभा सीट पर अकेले भाजपा के टिकट पर जीत हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उनका मानना है कि भाजपा-अकाली दल गठबंधन की स्थिति में ही जीत की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
कांग्रेस में बेहतर दिख रही चुनावी संभावनाएं
कांग्रेस के साथ रहते हुए अमरिंदर परिवार को पटियाला क्षेत्र में लगातार चुनावी सफलता मिलती रही है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर उनकी जीत की संभावना अधिक हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, परिवार इस सीट से कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेटी जय इंदर कौर को चुनाव मैदान में उतारने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस नेतृत्व उनकी वापसी को लेकर क्या रुख अपनाता है।
कांग्रेस के भीतर भी अलग-अलग राय
कैप्टन अमरिंदर सिंह की संभावित वापसी को लेकर कांग्रेस के भीतर एकमत स्थिति नहीं है। कुछ नेता उनके दोबारा पार्टी में आने के विरोध में हैं, जबकि कई वरिष्ठ नेता इसे राजनीतिक रूप से लाभकारी कदम मानते हैं।
भाजपा में बड़े पद की उम्मीद भी नहीं हुई पूरी
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी रही है कि भाजपा में शामिल होने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को किसी राज्य का राज्यपाल या कोई अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक पद मिलने की उम्मीद थी। लेकिन कई वर्षों के इंतजार के बावजूद उन्हें ऐसा कोई बड़ा दायित्व नहीं मिला।
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से उन्हें कोई प्रमुख प्रशासनिक या संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई, जिससे उनके समर्थकों में भी निराशा बढ़ी।
प्रीनीत कौर ने भाजपा नेतृत्व के प्रति जताया समर्थन
इन तमाम चर्चाओं के बीच एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तरुण चुघ, पूर्व सांसद रवनीत सिंह बिट्टू और कैप्टन अमरिंदर सिंह की तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित की गईं। इसे भाजपा द्वारा कैप्टन को दिए जा रहे महत्व के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी और पूर्व कांग्रेस सांसद से भाजपा नेता बनीं प्रीनीत कौर ने नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को अपना पूरा समर्थन देने की बात कही। उन्होंने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया।
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