ईरान में जहां एक ओर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद शोक का माहौल बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान लगातार चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई के अंतिम संस्कार में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए, जिसे दुनिया के सबसे बड़े अंतिम संस्कार आयोजनों में से एक माना जा रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर अब भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी हमलावर हो गई है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने ट्रंप के बयान को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
ट्रंप के किन बयानों पर मचा विवाद?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और खामेनेई को लेकर कई ऐसे बयान दिए हैं, जिन पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक बयान में उन्होंने कहा कि “हमने ईरान को खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए छुट्टी दी है।”
इसके अलावा ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने युद्ध के दौरान ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने यह भी कहा कि “वे सभी वहीं मौजूद हैं और अमेरिका चाहे तो एक ही कार्रवाई में सबको खत्म कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जाएगा क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा।”ट्रंप के इन बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार से पूछे सवाल
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि खबरों के अनुसार अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में लगभग 1 करोड़ लोगों की मौजूदगी रही, जो संभवतः इतिहास की सबसे बड़ी अंतिम यात्रा में से एक हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि श्रद्धांजलि देने के लिए भारत से भी कई प्रतिनिधि ईरान पहुंचे थे।
पवन खेड़ा ने ट्रंप की टिप्पणी को “भड़काऊ” और “गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
मोदी सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसे बयानों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका के खिलाफ खुलकर बोलने से बच रही है। खेड़ा ने कहा कि देश की जनता यह देख रही है कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत सरकार किस तरह की कूटनीतिक भूमिका निभा रही है।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर बढ़ी वैश्विक चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे समय में बड़े नेताओं के बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति पर गहरा असर डालते हैं।
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