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जनरल धीरज सेठ ने पद संभालते ही दिया ऐसा संदेश, बढ़ी दुश्मनों की चिंता

भारतीय सेना के नए प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पदभार संभालते ही पूरी सैन्य व्यवस्था को स्पष्ट संकेत दिया है कि भविष्य की हर चुनौती का सामना करने के लिए सेना को हर समय पूरी तरह तैयार रहना होगा। उन्होंने युद्धक क्षमता, नेतृत्व, अनुशासन और वास्तविक परिचालन तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए हैं।

युद्धक तैयारी को बनाया सर्वोच्च प्राथमिकता

भारतीय सेना के नए प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 6 जुलाई 2026 को अधिकारियों को “Together Towards Excellence” शीर्षक से एक पत्र जारी किया। इस पत्र में उन्होंने साफ कहा कि सेना की सबसे बड़ी प्राथमिकता युद्धक तैयारी होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऑपरेशन सिंदूर 2.0 और ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2.0 जैसी किसी भी संभावित परिस्थिति का सामना करने के लिए सभी इकाइयां पूरी तरह तैयार रहें।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल तैयारियों के दावे पर्याप्त नहीं होंगे। प्रत्येक सैन्य इकाई की वास्तविक परिचालन क्षमता और किसी भी समय मिशन के लिए तत्पर रहने की स्थिति ही सफलता का वास्तविक पैमाना होगी।

केवल हथियार नहीं, पूरी व्यवस्था की होगी परीक्षा

सेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान की सफलता केवल आधुनिक हथियारों या गोला-बारूद पर निर्भर नहीं करती। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अचानक निरीक्षण और मौके पर समीक्षा के जरिए प्रत्येक इकाई की वास्तविक तैयारी का आकलन किया जाए।

उन्होंने कहा कि युद्धक क्षमता में मजबूत रसद व्यवस्था, प्रशिक्षित मानव संसाधन, सैनिकों का मनोबल, आवश्यक सामग्री की उपलब्धता और विभिन्न स्तरों पर बेहतर समन्वय समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उनका जोर इस बात पर रहा कि हर समय मिशन के लिए तैयार रहने की संस्कृति ही सेना की सबसे बड़ी ताकत बने।

व्यवहारिक सोच अपनाने पर दिया विशेष जोर

जनरल धीरज सेठ ने अधिकारियों को कठिन परिस्थितियों में व्यावहारिक सोच अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आदर्श समाधान की प्रतीक्षा करने के बजाय ऐसे उपाय अपनाने चाहिए जो सरल, प्रभावी और तुरंत लागू किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे सुधार भी युद्धक्षेत्र में बड़ा रणनीतिक लाभ दिला सकते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जिन प्रक्रियाओं ने वास्तविक युद्ध के दौरान अपनी उपयोगिता साबित की है, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सेना को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना होगा, लेकिन जवाबदेही और गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

विकसित भारत 2047 में सेना की भूमिका भी अहम

अपने संदेश में जनरल सेठ ने कहा कि भारतीय सेना की जिम्मेदारी केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में सेना की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

उन्होंने अधिकारियों से लगातार अध्ययन करने, ज्ञान बढ़ाने और बौद्धिक रूप से स्वयं को मजबूत बनाने का आह्वान किया। साथ ही यह भी कहा कि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए हर बार उच्च स्तर पर निर्भर रहने के बजाय इकाई स्तर पर ही प्रभावी निर्णय लेने की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।

अधिकारियों को स्वयं उदाहरण बनने की सलाह

सेना प्रमुख ने नेतृत्व की वास्तविक परिभाषा समझाते हुए कहा कि अधिकारियों को अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम रहें, सैनिकों के साथ कठिन परिस्थितियों को साझा करें और ऐसा कार्य वातावरण तैयार करें जहां अधीनस्थ सम्मानपूर्वक कार्य कर सकें।

उन्होंने नई सोच, नवाचार और सीमित दायरे में गलतियों से सीखने की संस्कृति को मजबूत नेतृत्व की आधारशिला बताया। उनके अनुसार इसी वातावरण से आत्मविश्वासी, सक्षम और प्रभावशाली सैन्य नेतृत्व तैयार होगा।

सोशल मीडिया को बताया नया रणक्षेत्र

जनरल धीरज सेठ ने चेतावनी दी कि आधुनिक समय में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया अब एक नया रणक्षेत्र बन चुका है, जहां विरोधी ताकतें धुंधले युद्ध (Grey Zone Warfare) की रणनीति के तहत मानसिक और सूचनात्मक हमले करती हैं।

उन्होंने अधिकारियों को सोशल मीडिया पर अत्यधिक सतर्क, संयमित और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के निर्देश दिए ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा न बने।

नैतिक मूल्यों और संतुलित जीवन पर भी दिया जोर

अपने संदेश के अंत में सेना प्रमुख ने अधिकारियों से सर्वोच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने, संवेदनशीलता बनाए रखने और विशेष रूप से पूर्व सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सैन्य दायित्वों के साथ परिवार, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। उनका स्पष्ट संदेश था कि सैनिक होना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने का संपूर्ण तरीका है। उन्होंने अधिकारियों की निर्णय क्षमता, पेशेवर दक्षता और कठिन परिस्थितियों में अडिग रहने की क्षमता पर भरोसा जताते हुए हर समय तैयार रहने का आह्वान किया।

अग्रिम इलाकों में तैयारियों की भी ली समीक्षा

सेना प्रमुख का यह संदेश ऐसे समय सामने आया है जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों के अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, अभियानगत तैयारियों और सैनिकों की युद्ध तत्परता की विस्तृत समीक्षा की।

सेनाध्यक्ष बनने के बाद पुंछ के अग्रिम इलाकों का यह उनका पहला दौरा था। अधिकारियों ने उन्हें बदलते सुरक्षा माहौल, सैन्य तैनाती, निगरानी व्यवस्था, क्षेत्र में किए गए नए नवाचारों तथा समन्वित परिचालन तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।


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