जम्मू-कश्मीर का पुंछ जिला रणनीतिक दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में गिना जाता है। यह क्षेत्र नियंत्रण रेखा (LoC) के बेहद करीब स्थित है और कई स्थान ऐसे हैं जहां सीमा की दूरी कुछ किलोमीटर तक ही सीमित रह जाती है। पुंछ शहर से नियंत्रण रेखा लगभग 10 किलोमीटर दूर मानी जाती है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का रावलाकोट इलाका सीमा के पार करीब चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसी भौगोलिक स्थिति के कारण सीमा पार होने वाली किसी भी गतिविधि का असर पुंछ और आसपास के क्षेत्रों में तुरंत दिखाई देने लगता है।
PoK में विरोध प्रदर्शन के बाद बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
हाल के दिनों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलाकोट और मुजफ्फराबाद समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन और अस्थिरता की खबरें सामने आई हैं। प्रदर्शन के दौरान कुछ समूहों द्वारा भारत की ओर सीमा खोलने की मांग भी उठाई गई है।
इन हालातों को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई हैं। पुंछ और उससे जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं। संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत किया गया है।
नियंत्रण रेखा के पास सेना का बड़ा छद्म अभ्यास
रविवार को मेंढर सेक्टर समेत नियंत्रण रेखा से जुड़े कई अग्रिम क्षेत्रों और अंदरूनी इलाकों में एक साथ व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अधिकारियों के अनुसार इस अभ्यास का उद्देश्य सेना की युद्धक तैयारी और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना था।
अभ्यास के दौरान आतंकवादी हमले जैसी स्थिति तैयार की गई। इसमें नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की क्षमता को परखा गया।
राष्ट्रीय राइफल्स समेत कई यूनिटों ने लिया हिस्सा
इस अभियान में राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों के अलावा सेना की अन्य इकाइयों ने भी सक्रिय भागीदारी की। सुरक्षा एजेंसियों ने यह जांचने का प्रयास किया कि किसी हमले या आपात स्थिति में कितनी तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों को भी जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। लोगों को संकट के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों और प्रशासन के दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई।
स्थानीय लोगों ने बताया जरूरी कदम
सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि इस तरह के सुरक्षा अभ्यास उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि सीमा क्षेत्रों में हालात अचानक बदल सकते हैं, इसलिए पहले से तैयारी और जागरूकता नुकसान को कम करने में मदद करती है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार यदि आम नागरिकों को समय रहते सही प्रशिक्षण और जानकारी मिलती रहे तो किसी भी आतंकी हमले या आपदा की स्थिति में जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ी
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को हाल ही में कुछ गोपनीय इनपुट मिले हैं, जिनमें आतंकवादी संगठनों द्वारा पुंछ क्षेत्र में घुसपैठ या आतंकी गतिविधियों की कोशिश की आशंका जताई गई है।
इन इनपुट्स के बाद सुरनकोट और मेंढर क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। कई नई चौकियां बनाई गई हैं और मुख्य सड़कों, सार्वजनिक स्थलों तथा अन्य संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।
लोगों से सतर्क रहने और सहयोग की अपील
अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बल लगातार महत्वपूर्ण स्थानों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे सुरक्षा जांच में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की तुरंत जानकारी दें।
पुंछ-रावलाकोट मार्ग का रहा है ऐतिहासिक महत्व
पुंछ क्षेत्र का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पुंछ-उरी क्षेत्रीय पट्टी का हिस्सा है। अतीत में यहां नियंत्रण रेखा पार सीमित व्यापार और लोगों की आवाजाही की व्यवस्था भी रही है।
चक्कन दा बाग के जरिए पुंछ-रावलाकोट मार्ग कभी दोनों ओर के लोगों के संपर्क का अहम माध्यम माना जाता था। हालांकि बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियों के कारण अब इस मार्ग पर गतिविधियां बेहद सीमित और कड़ी निगरानी के दायरे में हैं।
सीमा पर तनाव के बीच सेना का स्पष्ट संदेश
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बढ़ती बेचैनी, घुसपैठ की आशंका और नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव के बीच पुंछ में किया गया यह छद्म अभ्यास केवल नियमित सैन्य गतिविधि नहीं है।
इसे भारतीय सुरक्षा तंत्र की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सीमा पार से होने वाली किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह तैयार है।
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