भारत अपने सबसे संवेदनशील सामरिक क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा को पहले से अधिक मजबूत बनाने में जुट गया है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का पूर्वी कमान के प्रमुख सैन्य ठिकानों का दौरा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। देश अब सीमाओं की निगरानी तक सीमित नहीं रहकर किसी भी चुनौती का त्वरित और प्रभावी जवाब देने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है।
सेना प्रमुख का दौरा, पूर्वोत्तर सुरक्षा पर विशेष जोर
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पूर्वी कमान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, विशेष रूप से बेंगडुबी मिलिट्री स्टेशन और नागालैंड स्थित 3 कोर (स्पीयर कोर) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मौजूदा सुरक्षा हालात, सैनिकों की तैनाती, आधुनिक निगरानी प्रणालियों और सैन्य तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। साथ ही तकनीक के बेहतर उपयोग, सेना के आधुनिकीकरण और परिचालन क्षमता को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा की गई।
क्यों बेहद अहम है सिलीगुड़ी कॉरिडोर?
बेंगडुबी मिलिट्री स्टेशन सिलीगुड़ी कॉरिडोर के उत्तरी प्रवेश द्वार पर स्थित है। नेपाल और बांग्लादेश के बीच मौजूद यह संकरा भू-भाग भारत का रणनीतिक ‘चिकन नेक’ कहलाता है। अपने सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई 20 किलोमीटर से भी कम है।
यही मार्ग भारत के मुख्य भूभाग को असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे आठ पूर्वोत्तर राज्यों से सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से जोड़ता है। किसी संघर्ष या आपात स्थिति में यदि यह संपर्क प्रभावित होता है तो पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में सैन्य रसद, नागरिक आपूर्ति और सहायता व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
युद्धस्तर पर मजबूत हो रहा रक्षा और परिवहन नेटवर्क
इस रणनीतिक महत्व को देखते हुए केंद्र सरकार पूरे क्षेत्र में रक्षा और परिवहन अवसंरचना को तेजी से विकसित कर रही है। भारतीय रेलवे ने हाल ही में 35 किलोमीटर लंबी भूमिगत रेल लाइन बनाने की योजना घोषित की है। इसका उद्देश्य युद्ध, आतंकी हमले या तोड़फोड़ जैसी परिस्थितियों में भी सैन्य उपकरणों और नागरिक आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है। यह परियोजना भविष्य में भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करेगी।
सड़क नेटवर्क और सीमा सुरक्षा को भी मिली नई मजबूती
रेल परियोजना के साथ-साथ सड़क संपर्क को भी मजबूत किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सात महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम (एनएचआईडीसीएल) को सौंप दी है।
इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को 120 एकड़ से अधिक भूमि हस्तांतरित की गई है, जिससे निगरानी व्यवस्था बेहतर होगी और सुरक्षा बलों की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी।
हासीमारा एयरबेस और बागडोगरा की बढ़ी रणनीतिक भूमिका
इस सुरक्षा ढांचे में बागडोगरा हवाई अड्डा और हासीमारा वायुसेना स्टेशन की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। हासीमारा एयरबेस भारतीय वायुसेना के 101 स्क्वाड्रन का मुख्य ठिकाना है, जहां देश के दो परिचालन राफेल स्क्वॉड्रनों में से एक तैनात है। इससे पूर्वी क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति या सैन्य चुनौती का जवाब पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और प्रभावी ढंग से दिया जा सकता है।
आधुनिक युद्ध क्षमता पर सेना का विशेष फोकस
पूर्वी कमान के दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने आधुनिक निगरानी प्रणाली, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की समीक्षा की। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारतीय सेना पारंपरिक युद्ध क्षमता के साथ-साथ भविष्य की आधुनिक सैन्य चुनौतियों के अनुरूप खुद को लगातार तैयार कर रही है।
3 कोर में पेश किया नया ‘VIJAY’ विजन
नागालैंड स्थित 3 कोर (स्पीयर कोर) के दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के लिए अपना नया विजन ‘VIJAY’ प्रस्तुत किया। यह भविष्य की सैन्य रणनीति का आधार माना जा रहा है।
इस विजन के पांच प्रमुख स्तंभ हैं—
- Vigilance (सतर्कता)
- Innovation (नवाचार)
- Jointness (संयुक्तता)
- Atmanirbharta (आत्मनिर्भरता)
- Yodha First (योद्धा सर्वोपरि)
सेना प्रमुख ने कहा कि इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर भारतीय सेना अधिक चुस्त, अनुकूलनशील और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनेगी।
सेना प्रमुख का दूसरा अग्रिम क्षेत्र दौरा
सेना प्रमुख बनने के बाद यह जनरल धीरज सेठ का दूसरा अग्रिम क्षेत्र का दौरा है। इससे पहले उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुंछ-राजौरी-सुंदरबनी सेक्टर में 16 कोर (व्हाइट नाइट कोर) की अग्रिम चौकियों का निरीक्षण किया था। इससे स्पष्ट है कि सेना नेतृत्व पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों की सुरक्षा तैयारियों का लगातार प्रत्यक्ष मूल्यांकन कर रहा है।
भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
सामरिक दृष्टि से सिलीगुड़ी कॉरिडोर केवल एक सीमावर्ती इलाका नहीं, बल्कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता और पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क बनाए रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, पूर्वोत्तर की संवेदनशील सुरक्षा परिस्थितियां और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच इस कॉरिडोर का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में सड़क, रेल, वायुसेना, सीमा सुरक्षा और आधुनिक सैन्य तकनीकों को एकीकृत करते हुए भारत जिस बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचे का निर्माण कर रहा है, वह वर्तमान सुरक्षा आवश्यकताओं के साथ-साथ भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए भी एक मजबूत रणनीतिक तैयारी का संकेत देता है। सेना प्रमुख का हालिया दौरा इसी व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण को और स्पष्ट करता है।
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