खबर संसार नई दिल्ली: प्राइवेट व सरकारी कर्मचारियों को central government की ओर से सौगात! मिलने जा रही है, क्योंकि आने वाले कुछ महीनों में श्रम कानूनों में बदलाव होने जा रहा है। इससे आपके हाथ में आने वाला मूल वेतन तो कम हो जाएगा, लेकिन पीएफ और गे्रच्युटी बेहद फायद देखने को मिलेगा।
इसके लिए पीएफ स्ट्रक्चर में बदलाव होने जा बाद कर्मचारियों का मूल वेतन कम हो जाएगा और भविष्य निधि में ज्यादा पैसा जमा होगा। क्योंकि central government 1 अक्टूबर 2021 से देश में लेबर कोड के नियमों को लागू करने जा रही है।
central government करेगा इन कानूनों में बदलाव
नए श्रम कानूनों से कर्मचारियों की बेसिक वेतन और भविष्य निधि की गणना में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलेगा। central government श्रम मं़त्रालय औद्योगिक संबंध वेतन, सामाजिक सुरक्षा, व्यवसायिक सुरक्षा तथा कार्यस्थिति को लेकर नया नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। चार श्रम संहिताओं के तहत 44 केन्द्रीय श्रम कानूनों को सुसंगत किया जा सकेगा।
बढ़ोत्तरी के साथ मिलेगा वेतन
नए कानून आने के बाद कर्मचारियों का मूल वेतन 15,000 से बढ़कर 21,000 हजार रूपये तक होने की संभावना है। लेबर यूनियन की हमेशा से ही मांग रही है कि मूल वेतन कम से 21,000 हजार रूपये होना चाहिए। इसलिए आने वाले दिनों में आपका वेतन बढ़ा हुआ नजर आएगा।
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भविष्य निधि की गणना मूल वेतन के आधार पर
नये वेतनमान के तहत भत्तों को 50 फीसद तक सीमित रखा जाएगा। कर्मचारियों के मूल वेतन का 50 फीसद होगा। भविष्य निधि की गणना मूल वेतन के प्रतिशत के आधार पर की जाती है। इसमें मूल वेतन व महंगाई भत्ता शामिल रहता है। नये वेतन संहिता में भविष्य निधि योगदान कुल वेतन का 50 प्रतिशत के हिसाब से तय होता है।
ये होगा फायदा
नये वेतनमान के बदलाव के बाद मूल वेतन 50 फीसद या उससे अधिक हो सकती है। वहीं पीएफ में भी मूल वेतन के आधार पर ही गणना की जाती है। इससे कर्मचारी और कंपनी का योगदान बढ़ जाता है। इससे ग्रेच्युटी और पीएफ योगदान बढ़ता है और रिटायरमेंट के बाद रकम ज्यादा मिलती है।
कर्मचारियों का योगदान बढ़ने से कम्पनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा। क्योंकि मूल वेतने बढ़ने से ग्रेच्युटी की रकम भी अब पहले से ज्यादा होगी। ये पहले के मुकाबले डेढ़ गुना तक ज्यादा हो सकती है।



