बॉर्डर पर अचानक सख्ती, अब हर खरीद पर क्यों देना होगा टैक्स? जी, हां भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा लंबे समय से दोनों देशों के लोगों के लिए व्यापार और रोजमर्रा की जरूरतों का प्रमुख माध्यम रही है। खासतौर पर बिहार से सटे 378 किलोमीटर के सीमा क्षेत्र में बसे करीब 50 ग्रामीण बाजारों में नेपाल के नागरिक नियमित खरीदारी करते रहे हैं।
लेकिन अब नेपाल सरकार के नए कस्टम नियम ने इस व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। शादी के सीजन में जहां बाजारों में रौनक बढ़ती थी, वहीं इस बार कारोबार पर नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।
100 रुपये से अधिक खरीदारी पर अब देना होगा भंसार
नेपाल सरकार के निर्देश के अनुसार, अब भारत से 100 रुपये से अधिक की किसी भी खरीदारी पर कस्टम ड्यूटी (भंसार) देना अनिवार्य कर दिया गया है।
पहले छोटे स्तर की खरीदारी पर छूट मिल जाती थी, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार सुचारू रूप से चलता था। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद हर खरीदारी पर टैक्स देना जरूरी हो गया है।
खरीदारों और व्यापारियों दोनों पर दबाव
सीमावर्ती नेपाली नागरिक वर्षों से बिहार के स्थानीय बाजारों से खाद्य सामग्री, कपड़े, कॉस्मेटिक्स, दवाएं, फल-सब्जियां और अन्य जरूरी सामान खरीदते रहे हैं।
अब कस्टम ड्यूटी लागू होने से इन वस्तुओं की लागत बढ़ गई है। अनुमान के अनुसार, खरीदे गए सामान पर 5% से 30% तक भंसार देना पड़ सकता है। इसका सीधा असर न केवल खरीदारों की जेब पर पड़ रहा है, बल्कि स्थानीय व्यापारियों की आय पर भी असर देखने को मिल रहा है।
मधेश क्षेत्र के जिलों में बढ़ी चिंता
कारोबारियों के मुताबिक, इस नए नियम का सबसे ज्यादा असर नेपाल के मधेश प्रांत के छह जिलों के लोगों पर पड़ा है। सीमा से जुड़े परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है, वहीं बिहार के बाजारों में ग्राहकों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है।
पहले यूपी, अब बिहार सीमा पर सख्ती
नेपाल के सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए इस नियम की जानकारी दी है। इसमें साफ कहा गया है कि आम नागरिक, सरकारी कर्मचारी या NGO से जुड़े लोग—किसी को भी इस नियम में छूट नहीं मिलेगी।
इससे पहले उत्तर प्रदेश सीमा पर भी इसी तरह की सख्ती देखी गई थी, जहां छोटे सामान की खरीद पर भी जांच की जा रही थी। अब यही नियम बिहार सीमा पर भी सख्ती से लागू किया जा रहा है।
सीमा व्यापार पर दीर्घकालिक असर संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लंबे समय तक जारी रहा, तो सीमा क्षेत्र के छोटे व्यापारियों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। साथ ही, दोनों देशों के बीच पारंपरिक छोटे स्तर के व्यापार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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