खबर संसार बागेश्वर. बसंत कुमार कॉंग्रेस से लड़ेंगे 16 को करेंगे नामांकन!जी हा अनुसूचित जाति विधानसभा बागेश्वर के उपचुनाव में 17 अगस्त तक नामांकन और 5 सितम्बर को मतदान होना है. माना जा रहा है मुकाबला रोचक रहेंगा.विदित रहे कि बागेश्वर विधानसभा में एक लाख बीस हजार मतदाता है पिछली बार 75 हजार लोगो ने मतदान किया था जिसमे एडवोकेट बसंत कुमार को 16000 वोट यानि 21 प्रतिशत वोट मिले. और उनका वोट प्रतिशत भी हर चुनाव में बढ़ रहा है. माना जा रहा है इस बार सफलता उनके हाथ लग सकती है.क्योंकि बसंत कुमार के वोट बैंक और कांग्रेस के वोट बैंक को मिला दिया जाये बम्पर वोट से विजय मिल सकती है एडवोकेट बसंत कुमार को.
इधर भाजपा ने कॉंग्रेस के रंजीत दास को अपने खेमे में लेकर अपना उत्साह बढ़ाने की कोशिश की है और सीएम धामी और भाजपा पार्टी इसको उपलब्धि के रूप में मानकर चल रही है. तो इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन मेहरा ने कहा अच्छा हुआ रंजीत चले गए क्योंकि ऐसे मौकापरस्त लोगो से पार्टी के वोट बैंक को नुकसान पहुंच सकता. हालांकि उन्होने कहा पार्टी पैनल में रंजीत दास का नाम भी सम्मिलित था.
इधर रंजीत दास का कहना है कि वो मुख्यमंत्री की कार्यशैली से प्रभावित होकर भाजपा में आए हैं उनको किसी ने भाजपा में आने के लिए मजबूर नहीं किया है ये मेरा निर्णय है उन्होंने कहा आत्मसम्मान बढ़ाने की मुहिम छेड़नी पड़ेगी.पाठको को बताये चले कि राज्य गठन के बाद बागेश्वर के विधानसभा चुनाव में चार बार भाजपा और एक बार वर्ष कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। वोट प्रतिशत हमेशा बदलता रहा, लेकिन भाजपा ने हमेशा बढ़त बनाए रखी। यहाँ तक कि एक बार भाजपा प्रत्याशी, ने 50 प्रतिशत वोट हासिल कर लिए थे। भले ही कांग्रेस हमेशा ही सीधे टक्कर में रही लेकिन वोट प्रतिशत अधिकतम 36 प्रतिशत ही पहुंच सका।लेकिन इस बार का गणित अलग लग रहा.
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 43.14 प्रतिशत वोट हासिल किया था। वहीं, 2017 की बात करें तो भाजपा प्रत्याशी को 50.08 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे। यह अब तक का अधिकतम संख्या है। अगर कांग्रेस के वोट प्रतिशत को देखें तो वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्याशी ने सबसे अधिक 36 प्रतिशत वोट हासिल किए थे फिर भी जीत हासिल नहीं कर सकी थी। इसके बाद कांग्रेस का वोट प्रतिशत से का गिरता ही रहा। इस सीट पर पहली ले बार उपचुनाव हो रहे हैं। ऐसे में र भाजपा अपने वोट प्रतिशत को कायम रखने के लिए हरसंभव कोशिश में है जुटी है। इसके लिए न केवल पार्टी अपनी बूथ स्तर तक पहुंचने की है रणनीति को लागू कर रही है बल्कि दूसरे दलों के मजबूत प्रत्याशी को अपने पक्ष में करने के लिए भी माहौल बना रही है। वहीं 2022 में कांग्रेस प्रत्याशी रहे रणजीत दास को अपने पक्ष में करना भाजपा चुनावी अखाड़े में खुद को और मजबूत दिखाने की कोशिश में लगी हुई है।


