ज्ञानवापी मस्जिद मामले में आज इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक बड़ी और निर्णायक सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई वजूखाना क्षेत्र के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से वैज्ञानिक तरीके से सर्वे की मांग से जुड़ी है। हिंदू पक्ष की ओर से दायर राखी सिंह की याचिका में पूरे परिसर की धार्मिक प्रकृति स्पष्ट करने के लिए गैर-आक्रामक तकनीक से सर्वे करवाने का आग्रह किया गया है, जबकि मस्जिद इंतजामिया कमेटी इस मांग का विरोध कर रही है।
वजूखाना सर्वे को लेकर पक्ष–विपक्ष की दलीलें
हिंदू पक्ष के वकीलों सौरभ तिवारी और अमिताभ त्रिवेदी ने तर्क दिया कि जिला न्यायाधीश की अदालत ने यह कहकर गलती की कि आवेदन में कानूनी रूप से संरक्षित क्षेत्र को सर्वे से बाहर रखने की मांग थी, जबकि ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया था। उनका कहना है कि वजूखाना क्षेत्र का सर्वे अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी क्षेत्र में मौजूद ढांचा हिंदू पक्ष द्वारा शिवलिंग बताया जा रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश अनुसार वजूखाना क्षेत्र का सर्वे बिना किसी क्षति पहुँचाए गैर-आक्रामक तकनीक से संभव है।
मस्जिद कमेटी ने जताया विरोध
मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने इस सर्वे के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह याचिका अनावश्यक विवाद को जन्म दे सकती है और धार्मिक तनाव बढ़ा सकती है। कमेटी ने अदालत से सर्वे की मांग को खारिज करने का आग्रह किया है।
हाई कोर्ट का पिछला आदेश और आज की सुनवाई का महत्व
इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने मस्जिद कमेटी को वाराणसी जिला न्यायाधीश के 21 अक्टूबर 2023 के आदेश के खिलाफ दायर दीवानी पुनरीक्षण याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए एक महीने का समय दिया था।
उल्लेखनीय है कि 21 जुलाई 2023 को जिला न्यायाधीश के आदेश पर एएसआई ने यह जांच शुरू की थी कि क्या मस्जिद का निर्माण किसी प्राचीन हिंदू मंदिर के ढांचे पर किया गया था।
आज की सुनवाई इस पूरे विवाद में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि अदालत यह तय कर सकती है कि वजूखाना क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे होगा या नहीं।
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