CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी
संसद के आगामी सत्र में विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव गुरुवार को संसद में पेश किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह अपने तरह का एक असाधारण और अहम संसदीय कदम होगा।
सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दल इस प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पेश करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है कि नोटिस केवल एक सदन में दिया जाएगा या दोनों सदनों में एक साथ पेश किया जाएगा। इस संबंध में अंतिम फैसला बुधवार शाम तक होने की संभावना जताई जा रही है।
विपक्षी दलों का संयुक्त प्रयास
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक वरिष्ठ नेता, जो इस प्रस्ताव के मसौदे को तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल रहे हैं, ने बताया कि यह पहल पूरी तरह से विपक्षी दलों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है।
उन्होंने कहा कि नोटिस तैयार करने से लेकर इसकी रणनीति बनाने तक सभी समान विचारधारा वाले दलों ने मिलकर काम किया है। नेता के अनुसार, जब यह प्रस्ताव संसद में पेश किया जाएगा तो दोनों सदनों में विपक्षी दलों का पूरा सहयोग देखने को मिलेगा।
टीएमसी नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त की आलोचना करते हुए कहा कि उनके कुछ फैसलों ने पद की गरिमा को प्रभावित किया है, जिसकी वजह से विपक्ष को यह कदम उठाने पर विचार करना पड़ा।
कांग्रेस और अन्य दलों का समर्थन
कांग्रेस सूत्रों ने भी पुष्टि की है कि पार्टी इस महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन करेगी। इसके अलावा इंडिया ब्लॉक में शामिल अन्य विपक्षी दलों ने भी इस पहल का समर्थन जताया है।
बताया जा रहा है कि प्रस्ताव का मसौदा कई विपक्षी दलों की संयुक्त चर्चा के बाद तैयार किया गया है। अब विपक्षी सांसद इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पेश करने के लिए दोनों सदनों के सदस्यों से हस्ताक्षर जुटाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
महाभियोग प्रस्ताव के लिए कितने सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी
संसदीय नियमों के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के लिए एक निश्चित संख्या में सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
- लोकसभा: कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर
- राज्यसभा: कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर
यदि यह संख्या पूरी हो जाती है, तो प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार कर आगे की संसदीय प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
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