अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर नरम पड़ने के बाद भारत को राहत मिली है। अमेरिका की कंपनी GE ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तीसरा एविएशन इंजन (F-404) डिलीवर किया है। माना जा रहा है कि चौथा इंजन भी सितंबर के अंत तक भारत पहुंच सकता है। अगस्त महीने में सप्लाई पूरी तरह रुकी हुई थी। इस देरी का सीधा असर LCA तेजस के उन्नत वर्जन मार्क-1ए के प्रोजेक्ट पर पड़ा।
HAL ने तैयार किए 10 वर्जन, अब परीक्षण बाकी
HAL अब तक LCA मार्क-1ए के 10 वर्जन तैयार कर चुका है। हालांकि, इंजन सप्लाई की देरी से यह प्रोजेक्ट तय समय से पीछे चल रहा है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी नाराजगी जता चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, सितंबर में LCA मार्क-1ए का फायरिंग परीक्षण होना है। इस दौरान स्वदेशी अस्त्रा मिसाइल और शॉर्ट रेंज एयर टू एयर मिसाइल का भी परीक्षण होगा। परीक्षण सफल रहने पर दो LCA विमान वायुसेना को सौंप दिए जाएंगे।
83 तेजस विमानों का करार
वर्ष 2021 में रक्षा मंत्रालय ने HAL से 83 LCA मार्क-1ए के लिए लगभग 48 हजार करोड़ रुपये का करार किया था। इसके लिए अमेरिका की GE कंपनी से 99 F-404 इंजन खरीदे गए। लेकिन अब तक केवल तीन इंजन भारत पहुंचे हैं। अमेरिका का दावा है कि यह देरी ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्या के कारण है। हालांकि, कूटनीतिक तनाव और टैरिफ विवाद को भी बड़ा कारण माना जा रहा है।
तेजस की सप्लाई 2026 तक
HAL का कहना है कि अगर इंजन सप्लाई सामान्य हुई तो मार्च 2026 तक वायुसेना को 10 तेजस लड़ाकू विमान सौंप दिए जाएंगे। पीएमओ के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्रा ने जुलाई में HAL की बेंगलुरू यूनिट का दौरा कर इस प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा भी की थी।
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