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Chilla Border पर किसानों ने किया चक्का जाम

नई दिल्ली, खबर संसार। Chilla Border के रास्ते दिल्ली आना-जाना आज आपको जाम में फंसा सकता है। केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए तीनों नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के विरोध में किसानों ने हाल ही में खुले Chilla Border को फिर से बंद कर दिया है।

नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने Chilla Border पर नारेबाजी के साथ फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसान सड़क पर लाठी-डंडा लेकर बैठ गए हैं जिसकी वजह से नोएडा से दिल्ली के बीच आवागमन बंद हो गया है।

Chilla Border से जाने वालों को होगी खासी परेशानी

राजनाथ सिंह से बातचीत के बाद एकबार ऐसा लगा था कि किसान मान गए हैं, लेकिन अब किसानों ने फिर बॉर्डर को बंद कर कर दिया है। जिससे नोएडा निवासियों के लिए खासा परेशानी खड़ी हो सकती है। हजारों लोग दिल्ली-नोएडा सफर करते हैं। चिल्ला बॉर्डर फिर से बंद होने से दिल्ली नोएडा सफर करने वालों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है।

वैकल्पिक रास्तों से जाने की सलाह

किसान दिल्ली से लगे सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर दो सप्ताह से डटे हैं। इसके मद्देनजर कई रास्ते बंद हैं। लोगों को परेशानी से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों से जाने की सलाह दी गई है। सिंघू, औचंदी, प्याऊ मनियारी, सबोली और मंगेश बॉर्डर बंद है और लोगों से लामपुर, सफियाबाद और सिंघू स्कूल टोल टैक्स बार्डर से होकर वैकल्पिक मार्ग पर जाने को कहा गया है।

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ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया

मुकरबा तथा जीटीके रोड से ट्रैफिक डायवर्ट है। आउटर रिंग रोड, जीटीके रोड और एनएच-44 पर जाने से बचने को कहा गया है। गाजियाबाद से दिल्ली आने वाले लोगों के लिए गाजीपुर बॉर्डर बंद रहेगा। लोगों को आनंद विहार, डीएनडी,अप्सरा और भोपुरा बॉर्डर से होकर आने की सलाह दी गई है।

राजनाथ से बातचीत के बाद मान गए थे किसान

शनिवार को नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के तेवर अचानक बदल गए थे। किसानों के एक गुट ने कहा था कि कृषि मंत्री और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद ये कदम उठाया गया। जिसके बाद चिल्ला बॉर्डर को आम नागरिकों के लिए खोला गया था।

आंदोलन का आज 21वां दिन, पीछे हटने के तैयार नहीं किसान

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों के विरोध प्रदर्शन का आज 21वां दिन है, लेकिन किसान किसी भी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सरकार और किसानों के बीच 6 दौर की बातचीत भी हो चुकी है जो बेनतीजा रही। किसान संगठन इस कानून को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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