खबर संसार देहरादून। गुटबाजी नहीं थमी तो कांग्रेस खत्म ना हो जाए! जी हा जिस तरह गिने चुने विधायको में भी दो फाड़ । कल का सीन तो यही बया कर रहा था।आधे विधायक गायब होने से आर्य दिखे विचलित!जी हा कांग्रेस के बहुत कम विधायक मौजूद दिखे ,मौका था यशपाल आर्य के नेता प्रतिपक्ष कार्यभार ग्रहण का। मौजूद विधायको में भुवन कापड़ी, अनुपमा रावत,आदेश चौहान, फुरकान अहमद, ममता राकेश, मनोज तिवारी, गोपाल राणा, वीरेंद्र जाति, सुमित हृदयेश और रवि बहादुर।
गुटबाजी नहीं थमी तो कांग्रेस खत्म ना हो जाए!
बताते चले की उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की हार और पार्टी हाईकमान के निर्णय से पैदा असंतोष कांग्रेस की भविष्य की सियासत के लिए बहुत बुरे संकेत दिख रहे है। जो निश्चित रूप से पार्टी के हित में कतई नहीं है। पहला मौका है जब कांग्रेस हाईकमान और प्रदेश प्रभारी के फैसलों व भूमिका पर खुलकर सवाल उठाए गए हैं। कार्रवाई की चेतावनी के बाद भी बयानबाजी पर रोक नहीं लग पा रही है।
विधानसभा चुनाव में अच्छी मेहनत करने के बावजूद इस्तीफा लिए जाने से पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल काफी नाराज हैं। दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष पद के सबसे प्रबल दावेदार प्रीतम सिंह भी नाराज चल रहे है। क्योंकि हाईकमान द्वारा उन पर गुटबाजी का आरोप मढ़ा गया है,जिससे प्रीतम सिंह बेहद नाराज है। दूसरी ओर विधायक राजेंद्र भंडारी, मदन बिष्ट, हरीश धामी का गुस्सा भी पब्लिकली सामने आ चुका है। सभी वरिष्ठ नेताओं को लगता है कि पार्टी हाईकमान और प्रदेश प्रभारी के स्तर पर उनके साथ लगातार नाइंसाफी हो रही है। विधायको के असंतोष को देखते हुए हाईकमान प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को अन्यंत्र शिफ्ट कर सकता है। प्रदेश प्रभारी प्रदेश के सभी असंतुष्ट नेताओं के निशाने पर हैं। तीनों शीर्ष पदों पर चयन व चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर काफी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हाईकमान असंतोष दूर करने के लिए प्रभारी को उत्तराखंड के बजाए कोई दूसरी जिम्मेदारी दे सकता है। गढ़वाल की उपेक्षा के भाव को खत्म करने के लिए यहां के वरिष्ठ नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी देने पर भी करीब करीब सहमति बन चुकी है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पार्टी हाईकमान ने यशपाल आर्य को नेता प्रतिपक्ष बनाने का शानदार फैसला लिया है। आर्य का अनुभव उत्तराखंड के लिए लाभप्रद होगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा कि मैं हाईकमान को धन्यवाद दूंगा कि आर्य जैसे सबसे परिपक्व संसदीय अनुभवी व्यक्ति को नेता प्रतिपक्ष बनाया। विधायकों में नाराजगी नहीं है। धारचूला विधायक हरीश धामी पहले थोड़ा गुस्से में थे, अब वे भी शांत हैं।
पिथौरागढ़ विधायक मयूख महर ने भी सोमवार को खुलकर अपनी नाराजगी का इजहार किया। बकौल मयूख, आखिर कब तक सीनियर लोगों की उपेक्षा होती रहेगी? जूनियर लोगों को अहम पद दिए जा रहे हैं और सीनियर की अनदेखी हो रही है। मयूख ने कहा कि सभी इस बात को महसूस कर रहे हैं कि उनकी उपेक्षा हो रही है। हमें बहुत बुरा लगा है। बहुत जूनियर लोगों को मौके मिल रहे हैं। मेरी तीन पीढ़ियां कांग्रेस से जुड़ी हैं और आज उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
नवनियुक्त नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सोमवार को विधानसभा में विधिवत तौर पर कार्यभार ग्रहण कर लिया। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के कार्यभार ग्रहण की तरह ही इस कार्यक्रम में भी पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, राजेंद्र भंडारी, मदन बिष्ट समेत पार्टी के आठ विधायक शामिल नहीं हो पाए। विधायकों की गैरहाजिरी और गवर्नर से भेंट की वजह से आर्य को सोमवार को प्रस्तावित विधानमंडल दल की बैठक स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस ने विधायकों की गैरहाजिरी के पीछे अस्वस्थता और क्षेत्र में कार्यक्रमों में व्यस्तता को वजह बताया।
कार्यक्रम के अनुसार,आर्य को सुबह 11 बजे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में कार्यभार ग्रहण करना था। पर 11:40 बजे तक केवल विधायक दल के उपनेता भुवन कापड़ी, गोपाल राणा, मनोज तिवारी, सुमित हृदयेश, अनुपमा रावत व आदेश चौहान ही पहुंचे। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव और पूर्व सीएम हरीश रावत भी देर से पहुंचे। विधायकों की गैरहाजिरी से उपजी परेशानी, आर्य के चेहरे पर साफ दिख रही थी। 12 बजे 10 विधायकों के एकत्र होने पर आर्य ने कार्यभार ग्रहण की औपचारिकता पूरी की। पूर्व सीएम रावत, प्रभारी यादव, प्रदेश अध्यक्ष माहरा ने उन्हें गुलदस्ते देकर शुभकामनाएं दीं।
इधर यशपाल आर्य ने मोर्चा संभालते हुए कहा की कांग्रेस में न कोई गुटबाजी है और न असंतोष। मैं लगातार सभी विधायकों के संपर्क में हूं। पूरी कांग्रेस एकजुट है। विधायकों की कार्यक्रम से गैरहाजिरी को असंतोष का नाम नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा सदन में कांग्रेस सकारात्मक विपक्ष की भूमिका अदा करेगी। पर इसका यह अर्थ नहीं कि सरकार की हर बात का समर्थन करेंगे। राज्य हित-जन हित के मामलों में कांग्रेस सड़क से सदन तक सरकार को घेरेगी। कांग्रेस लोकायुक्त के गठन के लिए सरकार पर दबाव बनाएगी। वर्तमान सरकार लोकायुक्त को दबाकर बैठी है। राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण बिल को लेकर भी कांग्रेस मुहिम छेड़ेगी। इस दौरान विधायकों की नाराजगी पर पूछे सवालों से आर्य असहज दिखे। उन्होंने कहा, नाराजगी जैसी बात नहीं है। प्रीतम सिंह के क्षेत्र में हादसा हुआ है इसलिए पीड़ित परिवारों को सांत्वना के लिए वो वहीं हैं। कुछ और विधायक भी जरूरी कामों से अलग-अलग क्षेत्रों में हैं। कांग्रेस के निवर्तमान मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि व गढ़वाल मंडल प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने भी अलग-अलग बयानों में विधायकों की गैरहाजिरी पर मोर्चा संभाला। महर्षि ने कहा कि खुशहाल सिंह अधिकारी ने पहले ही इस बाबत सूचित कर दिया था। तिलकराज बेहड़ और राजेंद्र भंडारी अस्वस्थ हैं। विक्रम सिंह नेगी अपने क्षेत्र में हैं।


