भारत (India) अपनी वैक्सीन उत्पादन व आपूर्ति की क्षमता में इजाफा करेगा। पाकिस्तान को छोड़कर सभी पड़ोसी देशों बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका व अफगानिस्तान आदि को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन प्रदान की जाएगी।

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कई देश सरकार के स्तर पर बातचीत कर रहे हैं, जबकि कई ने सीधे वैक्सीन निर्माताओं को ऑर्डर दिया है। मध्यम व कम आय वाले देशों के लिए गावीकोवैक्स एलायंस भी एक विकल्प है।

इस गठबंधन में शामिल वैक्सीन निर्माता देश अपने यहां उत्पादित होने वाली खुराक का कुछ हिस्सा गरीब व मध्यम आय वाले देशों को देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि अपने देश में निर्मित हो रही कोविशील्ड व कोवैक्सीन की खुराक जरूरतमंद देशों को भी दी जाएगी।

इन देशों की वैकसीन की मांग

नेपाल : पड़ोसी देश ने 1.2 करोड़ वैक्सीन की मांग की है, जिसकी आपूर्ति की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने भारत (India) से अपनी 20 फीसद आबादी के लिए कोरोना वैक्सीन की खरीद में मदद मांगी है।

भूटान: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में बन रही ऑक्सफोर्डएस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन की 10 लाख खुराक के लिए आग्रह किया है।

म्यांमार: सीरम के साथ वैक्सीन की खरीद के लिए अनुबंध किया है। म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की नए साल पर घोषणा कर चुकी हैं कि भारत से वैक्सीन की पहली खेप की खरीद के लिए अनुबंध हो चुका है।

बांग्लादेश: कोविशील्ड की तीन करोड़ खुराक के लिए बांग्लादेश ने आग्रह किया है। पिछले साल नवंबर में वहां के बेक्सिमो फार्मा ने सीरम इंस्टीट्यूट के साथ करार किया है। बांग्लादेश को भारत में टीकाकरण की इजाजत मिलने का इंतजार था।

श्रीलंका: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के साथ बातचीत के दौरान कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।

साथ ही मालदीव, अफगानिस्तान, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, थाईलैंड की सरकारों ने भी जरूरत के हिसाब से भारत (India) से वैकसीन की मांग की है।

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