अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम समाप्त करने और तेहरान पर तीखी टिप्पणी करने के बाद ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी तरह की धमकी से डरने वाला नहीं है।
ट्रंप के बयान के बाद ईरान की दो टूक प्रतिक्रिया
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने बुधवार (8 जुलाई 2026) को कहा कि ईरान हर तरह की बुराई का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका कहना था कि अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियां ईरान को अपने रुख से पीछे नहीं हटा सकतीं।
ट्रंप ने तेहरान पर साधा निशाना
कुछ सप्ताह पहले तक ईरान के नेतृत्व को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बार काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा कि ईरान पर नए हमलों के बाद युद्धविराम समाप्त हो चुका है, हालांकि बातचीत की संभावना अभी भी बनी रह सकती है। ट्रंप ने कहा कि ईरान का रवैया ठीक नहीं है और वह गलत तरीके अपना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने वार्ताकारों को बातचीत जारी रखने की अनुमति दे सकते हैं, लेकिन उनकी राय में ईरान केवल समय बर्बाद कर रहा है।
अमेरिका और ईरान के सैन्य दावों से बढ़ा तनाव
यूएस सेंट्रल कमांड ने 8 जुलाई को दावा किया कि उसने ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में आईआरजीसी ने अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई करने का दावा किया। ईरानी सेना ने यह भी कहा कि दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी बलों को ड्रोन हमले के जरिए निशाना बनाया गया।
ईरानी संसद के स्पीकर ने अमेरिका की आलोचना की
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ ने 14 सूत्रीय समझौते के टूटने के लिए अमेरिका की आलोचना की। उन्होंने कहा कि समझौते के बावजूद अमेरिका ने ईरान पर हमले किए, जो तेहरान के खिलाफ दबाव बनाने की उसकी नीति को दर्शाता है।
“धमकी और दबाव का दौर खत्म हो चुका है”
मोहम्मद बगेर गालिबफ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि धमकी और जबरन दबाव बनाने का समय अब समाप्त हो चुका है और इससे कोई परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
उन्होंने अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उन बिंदुओं की सूची भी साझा की, जिनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नियमों की अनदेखी, हमलों की धमकियां, तेल प्रतिबंधों को दोबारा लागू करना, दक्षिणी ईरान पर हमले और लेबनान पर इजरायली हमलों का जारी रहना शामिल है।
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